राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री डॉ रमन सिंह जी के द्वारा दैनिक वेतन भोगियों को नियमितीकरण किया गया था। उसके बाद शासकीय विभागों में फिर से दैनिक वेतन भोगियों ने नियमितीकरण की मांग लगातार कर रहे हैं। और समय-समय पर एक दिवसीय रैली, अनिश्चितकालीन हड़ताल आदि के सहारे सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाता है। लोकतांत्रिक देश में सबको अपने मांग मांगने और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का अधिकार भी है। लेकिन प्रदेश में नियमितीकरण और अन्य मांगों को लेकर हड़ताल, रैली, करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
ना जाने कहां से रोज रोज दैनिक वेतन भोगी या विभिन्न विभागों में कार्य करने वालों की संख्या कैसे बढ़ रही है। संगठन के बहाने अनजान लोगों को संगठन में जोड़ जोड़ कर लोकलुभावन सपना दिखाकर लोगों को संगठन में जोड़ देते है और शांति के गढ़ माने जाने वाले छत्तीसगढ़ प्रदेश को हड़ताल गढ़ बना दिया गया है। छत्तीसगढ़ के शासकीय विभागों में कार्यरत अनेक संगठनों की संख्या अब सात लाख से भी अधिक हो गई है।
वरिष्ठ दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी हारुन मानिकपुरी ने छत्तीसगढ़ से अपील करते हुए कहा कि उम्र के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुके दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को समय पूर्व सेवानिवृत्त देकर उनके द्वारा किए गए विभागों में लम्बी सेवा का लाभ दें। और पचपन वर्ष से कम उम्र वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमितीकरण किया जावे। इससे सरकार को लंबा समय तक कर्मचारियों की कमी नहीं होगी। वहीं उम्र के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुके दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करते हैं तो साल दो साल बाद पुनः पद रिक्त हो जाएगा।
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