हमारा घर, हमारी पहचान खुशियों का घर-संसार...प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में ला रही खुशहाली

हमारा घर, हमारी पहचान खुशियों का घर-संसार...प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में ला रही खुशहाली

राजनांदगांव 24 सितम्बर 2024:  प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशहाली ला रही है। यह योजना कई परिवारों की आस है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से सम्मान बढऩे के साथ ही जनसामान्य के जीवन स्तर का उन्नयन हुआ है। ऐसा ही कुछ बदलाव आया राजनांदगांव विकासखंड के मोहारा के श्री होरी लाल देवांगन के जीवन में। श्री होरीलाल देवांगन ने बताया कि पहले कच्चे मकान में रहते थे, तो बहुत तकलीफ होती थी। मच्छर एवं कीचड़ के कारण परेशानी होती थी। जिससे बीमार हो जाते थे। अब सीलन से मुक्ति मिल गई है और घर भी स्वच्छ रहता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सहायता की तो आवास बनाने के लिए राशि प्राप्त हुई और हम नया पक्का घर बनाये। अब पक्के मकान में रहने के कारण हम लोगों की तबियत खराब नहीं होती और बहुत अच्छा लगता है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देवा साय को तहेदिल से धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि उनके बेटे की मोबाईल की दुकान है और सभी नाती-पोते स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी बहु श्रीमती इच्छावती देवांगन हथकरघा से कपड़ा बुनने का कार्य करती है और आर्थिक दृष्टिकोण से हमारा परिवार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि निराश्रित पेंशन योजना के तहत 500 रूपए की राशि प्रति माह प्राप्त हो रही है। 

 घर की खुबसूरत साज-सज्जा की गई है। श्री होरीलाल देवांगन की पत्नी श्रीमती घसनीन देवांगन ने बताया कि पहले कच्चा मकान था तो बहुत पानी टपकता था। धूल, मिट्टी के कारण बच्चों की खांसी-सर्दी के कारण तबियत खराब रहती थी। अब जब से हम लोग घर बनाये हैं और हंसी-खुशी से सपरिवार अपने पक्के घर में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि हम दोनों सास-बहू को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है। वही राशन कार्ड के माध्यम से प्रतिमाह नि:शुल्क 49 किलो चावल प्राप्त हो रहा है। उनकी बहु श्रीमती इच्छावती देवांगन ने बताया कि शासन की महतारी वंदन योजना बहुत अच्छी है। 1000 रूपए की राशि बच्चों की पढ़ाई लिखाई एवं दवाई में खर्च हो जाता है। वे हथकरघा से कपड़ा बुनने कार्य करती है, जिससे उन्हें आजीविका का एक साधन मिला है।








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