हरी मिर्च खाने को चटपटा बनाती है ये तो हम सभी जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि बड़े से बड़े हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स भी मानते हैं कि ये हमारे सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है.
खाने में जायका लगाने वाली हरी मिर्च लगभग हर एक घर में हर रोज खाई जाती है. यह हमारे खाने का हिस्सा है जिसके बिना कोई चटपटी चीज नहीं बनती. हरी मिर्च खाने को चटपटा बनाती है ये तो हम सभी जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि बड़े से बड़े हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स भी मानते हैं कि ये हमारे सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. तो चलिए जानते हैं कि आखिर हरी मिर्च के फायदे और घर में उगाने के तरीकों के बारे में.
पोषण की खान है हरी मिर्च
बता दें कि हरी मिर्च विटामिन सी का एक बेहतरीन स्रोत है. इसके अलावा हरी मिर्च में विटामिन ए, विटामिन बी, नियासिन, पाइरिडोक्सिन, राइबोफ्लेविन, थायमिन, फ्लेवोनोइड, बीटा-कैरोटीन,अल्फा-कैरोटीन, ल्यूटिन, ज़ेक्सैंथिन और क्रिप्टोक्सैंथिन जैसे कई एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है. वहीं इसमें पोटेशियम, मैंगनीज, आयरन और मैग्नीशियम जैसे खनिज भी होते हैं जो इसके पोषण मूल्य को बढ़ाते हैं.
मिर्च एक, रूप अनेक
अगर आप सोचते हैं कि हरी मिर्च केवल एक प्रकार की होती है तो बता दें कि इसके कई प्रकार होते हैं:
हरी मिर्च का इस्तेमाल आमतौर पर रोजाना के खाने में तीखापन लाने के लिए किया जाता है.
ज्वाला मिर्च गुजरात में पाई जाती है, जो कि छोटी, पतली और बहुत तीखी होती है. इन्हें अक्सर करी और अचार में इस्तेमाल किया जाता है.
कंथारी मिर्च को बर्ड्स आई मिर्च के नाम से भी जाना जाता है, जो कि केरल और तमिलनाडु में पाई जाती है.
विटामिन सी भी भरपूर कश्मीरी मिर्च जम्मू और कश्मीर में उगाई जाती है. यह हल्की होती है और करी और बिरयानी जैसे व्यंजनों की रंगत बढ़ाने का काम करती है.
नागा मिर्च बेहद तीखी मिर्च है जो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में पाई जाती है. हालांकि इसका इस्तेमाल काफी कम होता है. इसमें ज्यादा तीखापन होने के कारण इसे मसालेदार चीजों या चटनी में काफी कम मात्रा में डाला जाता है.
हरी मिर्च के गुण जान रह जाएंगे आप हैरान
एंटी-इंफ्लेमेंट्री (सूजनरोधी)- हरी मिर्च के तीखेपन का कारण है कैप्साइसिन. कैप्साइसिन सूजन को कम करने और इंफेक्टेड एरिया में बल्ड फ्लो को बढ़ाने में और चोट को भरने में मदद करता है.
एंटी-क्लॉटिंग एक्टिविटी- हरी मिर्च में कैप्साइसिन में एंटी-कोगुलेंट गुण पाए जाते हैं, जो ब्लड क्लॉट्स बनने से रोकने में मदद करते हैं. ये एक्टिविटी हेल्दी ब्लड को मेंटेन करती है.
एंटी ओवेसिटी एक्टिविटी- हरी मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन मेटाबॉलिज्म और फैट ऑक्सीडेंट को बढ़ाकर वजन घटाने में मददगार होती है. ये थर्मोजेनेसिस को बढ़ाकर शरीर गर्मी पैदा करता है, जिससे कैलोरी बर्निंग बढ़ जाती है और वजन घटाने में मदद मिलती है.
एंटी कैंसर एक्टिविटी- हरी मिर्च में मौजूद कैप्सैसिन कई कैंसर सेल्स में एपोप्टोसिस को कम करता है. यह सेलुलर सिग्नलिंग कैंसर सेल्स को बेअसर करने में मदद करता है. जिससे कैंसर का जोखिम कम होता है.
हरी मिर्च के फायदे
गठिया के दर्द को करता है कम- हरी मिर्च में कैप्साइसिन होता है, जिसमें एंटी-इंफ्लामेंट्री गुण होते हैं. कैप्साइसिन दिमाग को भेजे जाने वाले दर्द के संकेतों को रोकता है और सूजन को कम करता है. यही कारण है कि हरी मिर्च गठिया के दर्द का इलाज माना जाता है.
डायबिटीज न्यूरोपैथी - हरी मिर्च में मौजूद कैप्सैसिन नर्व रिसेप्टर्स डायबिटीज न्यूरोपैथी के कारण होने वाले दर्द से राहत दिलाती है.
हार्ट हेल्थ- हार्ट यानी दिल हमारे शरीर को सबसे अहम अंश है. हार्ट को हेल्दी रखने के लिए हेल्दी खान-पान बेहद जरूरी है. हरी मिर्च में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो हार्ट में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को जोखिम को कम करते हैं. जिससे हमें हार्ट संबंधी दिक्कतों से निजात मिलता है.
वजन घटाने में मददगार- हरी मिर्च मेटाबोलिज्म को बढ़ाने और फैट बर्न करने में मदद कर होती है. हरी मिर्च में एंटीऑक्सीडेंट्स गुण भरपूर मात्रा में होने के अलावा इसमें कैलोरी नहीं होती, जो वजन को कम करने में मदद कर सकती है.
पाचन में मददगार- हरी मिर्च एंटी-ऑक्सीडेंट का एक अच्छा सोर्स है. इसमें डाइट्री फाइबर्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो पाचन के लिए लाभदायक हो सकते हैं.
ऐसे उगाएं गमले में हरी मिर्च
एक ऐसा गमला या ट्रे लें जिसके नीचे से पानी निकलने की जगह हो.
अब गमले में मिट्टी और गोबर की खाद मिक्स कर के डालें.
गमले में मिट्टी डालकर मिर्च के बीज छिड़क देंगे और ऊपर से हल्की मिट्टी की परत डालकर ढक देंगे और पानी दें.
10 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर मिर्ची के बीज अंकुरित होते हैं.
बीज अंकुरित होने लगें तो सूरज की रोशनी में इस गमले को रख दें.15 दिन के बाद पौधे बढ़ने लगेंगे.
अगले 30 दिन के बाद ये पौधे और भी अधिक बढ़ जाएंगे. पौधों में जरूरत के हिसाब से पानी डालते रहें.
पौधे जब थोड़े बड़े हो जाएं तो इन्हें आप अलग-अलग बड़े गमलों में लगा दें. इन गमलों की मिट्टी के साथ वर्मी कंपोस्ट मिला लें.
बड़े गमलों में पौधे लगाने के बाद इनमें पानी डालें और धूप वाली जगह पर रखें.
एक महीने के बाद आप देखेंगे कि इन पौधों में मिर्च के फूल आने लगे हैं, और कुछ दिनों में ये फूल हरी मिर्च में बदल जाएंगे.
अब इन मिर्च को हल्के हाथों से पौधों से तोड़ लें और इसका लुत्फ मनपसंद तरीके से उठाएं.
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