रायगढ़ : साल दर साल धान खरीदी कम होती जा रही है। इस बार तो रिकॉर्ड कायम हो गया। रकबा और किसान संख्या बढऩे के बावजूद एक लाख हेक्टेयर रकबे पर भी धान नहीं बेच सके हैं। करीब 12 हजार किसान तो उपार्जन केंद्र ही नहीं पहुंचे। इस बार 73295 किसानों ने करीब 98053 हे. रकबे पर धान बेचा है। वर्ष 24-25 में 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से एक एकड़ में 21 क्विं. धान खरीदने का वादा किया गया था। ऐसा लगा था कि धान की बंपर आवक होगी। पिछले कई सालों का रिकॉर्ड टूट जाएगा, लेकिन इस बार पिछले साल से भी कम खरीदी हुई। इस साल 85241 किसानों ने 1,27,036 हे. रकबे का पंजीयन करवाया था।
रायगढ़ जिले में करीब 59 लाख क्विं. धान खरीदने का टारगेट रखा गया था। 31 जनवरी को धान खरीदी पूरी होते तक 73295 किसानों ने 50,87,976 क्विं. धान बेच लिया। हैरानी की बात यह है कि पंजीकृत रकबे में से 98,053 हे. पर ही धान बेचा गया। मतलब 11946 किसानों ने धान नहीं बेचा। इतने किसानों ने न तो टोकन कटवाया और न ही समिति में पहुंचे। पिछले पांच सालों में धान पंजीयन बढ़ा लेकिन विक्रय का रकबा घट रहा है। गत वर्ष की तुलना में धान बेचने वाले किसान भी घट गए और रकबा भी कम हो गया। रायगढ़ जिले में पिछले साल का आंकड़ा भी पार नहीं हुआ। वर्ष 23-24 में 83,056 पंजीकृत किसानों में से 73,377 ने 53.68 लाख क्विं. धान बेचा। 1.27 लाख हे. में से 1.03 लाख हे. रकबे पर ही धान बेचा गया। करीब 9600 किसानों ने धान नहीं बेचा था।
29 हजार हेक्टयेर का पंजीयन क्यों?
धान खरीदी के आंकड़े देखने पर कई तरह के सवाल उठते हैं। इस बार 1,27,036 हे. रकबे का पंजीयन हुआ था। इसमें से केवल 98053 हे. पर ही धान विक्रय हुआ। 28983 हे. पर धान बेचा ही नहीं गया। सवाल यह है कि पंजीयन के बावजूद धान क्यों नहीं बेचा गया। इस बार रायगढ़ जिले में धान विक्रय का रकबा एक लाख हे. से भी कम हो गया। तो क्या धान का उत्पादन घट गया या फिर बोगस पंजीयन हुआ था।
अन्तिम दो दिनों में दो लाख क्विंटल
तीन दिन तक धान खरीदी बंद रखने के बाद अंतिम दो दिन धान के लिए टोकन काटे गए। 2.99 लाख क्विंटल धान के टोकन जारी किए गए थे। 2,02,976 क्विं. धान बेचा गया। एक लाख क्विंटल धान बेचने किसान ही नहीं पहुंचे। कई किसानों का रकबा समर्पण करा दिया गया क्योंकि उनके पास धान ही नहीं था। बोगस खरीदी और एंट्री के कारण समितियों में घपला हुआ है। भौतिक सत्यापन के नाम पर अवैध उगाही के दर्जनों मामले सामने आए हैं, जिसमें कार्रवाई अब कलेक्टर पर निर्भर है।
धान उपार्जन वर्ष 2022-23 2023-24 2024-25
पंजीकृत किसान 76813 83056 83241
धान बेचने वाले 69346 73377 73295
पंजी. रकबा 1.21 लाख हे. 1.27 लाख हे. 1.27 लाख हे.
विक्रय रकबा 1.11 लाख हे. 1.03 लाख हे. 98053 हे.
शेष बचे किसान 7467 10679 9946
शेष रिक्त रकबा 7711 हे. 24000 हे. 28983 हे.



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