4 अप्रैल 2025: संसद से वक्फ संशोधन बिल पारित हो गया,विपक्षी पार्टियों का राजनीतिक चीरहरण अनवरत् जारी है,आस्था और कृष्ण कृपा से ही चीरहरण से द्रौपदी जैसा पवित्र सतीत्व हो तो मुक्ति मिलती है,पर विपक्ष एकपक्षीय, आस्था विहीन ,प्रभु विग्रहों के दर्शन से दूर है,ऐसे में होना वही था जो संसद में हुआ । एक और करारी हार ,काठ की हांडी CAA के मसले पर चढ़ गई, शाहीनबाग़ जैसे आंदोलन हो गए तो इन्हें लगा की वक्फ बोर्ड के नाम पर फिर वही माहौल बना वोटों की फसलें काटेंगे ,ना फसल उगी ,ना फसल कटी ,बल्कि फसलचक्र परिवर्तन हो गया ,मुस्लिमों और मुस्लिम समाज के कई संगठनों ने इस बिल का समर्थन कर दिया,बिलबिलाए बारम्बार हार के डर से भयाक्रांत विपक्षी नेताओं को अपनी और अपने रुदालियों के रुदन में कमी दिखने लगी, वोट छिटकते दिख रहे मुस्लिम वोटो पर एकाधिकार रखने वाला विपक्ष जिसने खिलाफत आंदोलन से बटवारे तक और उसके बाद मदरसा बोर्ड ,मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ,वक्फ बोर्ड ,धारा 370, 35 A ,1991 का धर्मस्थल कानून,शाहबानों प्रकरण जैसे कई जतन किये, आतंकियों के केस वापसी से लेकर उन्हें रोज विशिष्टता का अहसास दिलवाया पर अपनी विशिष्टता नही बचा पाए ,कभी देश पर एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस आज अवसान की ओर बढ़ रही ,सिकुड़ रही ,लोकतंत्र में बहुमत ही सबकुछ होता है,पर इसके मायने ये नही है की अल्पमत कुछ भी नही होता है,हारे और जीतें राजनीतिक प्रत्याशी और दलों के पास मत तो होते हैं,पर मतों के अंतर से ही कोई सत्ता में और कोई विपक्ष में होता है।
सरकार बहुमत की होती है जिसे संसद में कानून बनाने का संवैधानिक अधिकार होता है ,सरकार से असहमति हो सकती है, सड़कों में आंदोलन भी किया जा सकता है,पर कानून बदलने के लिए कम से कम पांच सालाना धैर्य और बहुमत चाहिए, जिसे अल्पमत की विपक्ष समझ नही पा रही,सत्ता की लालसा तो है पर जनमत को बदल नही पा रही,ये दोष किसका है ? जो रोज गंगा जमुनी तहजीब और पारिवारिक विरासतों की दुहाई देते हैं ,वो ना अपना परिवार एक रख पाते ,ना विरासत साझी कर पाते ,सोनिया ,मेनका हैं तो एक ही विरासत और एक ही परिवार की मुलायम के लिए अखिलेश औरंगजेब थे ऐसे कई उद्धरण हैं ,जब सत्ता की चाह में इन्होंने परिवार तोड़ डाला तो फिर सामाज देश की इन्हें कितनी परवाह होगी ? वक्फ संशोधन बिल पर संसद के दोनों सदनों में हुई बहस से विपक्षी गठबंधन की कलई खुली ,पुरानें सारे कुकर्मों का हिसाब हुआ ,आज की भी पीढ़ी ने समझ लिया की इन्होंने क्या -क्या कब -कब सत्ता में बने रहने के लिए एकतरफा संविधान की मूल भावना के खिलाफ जाकर कार्य किया । पारसी देश के वास्तविक अल्पसंख्यक हैं ,पर क्या उनकी बात कोई विपक्षी दल करता है ? धर्म निरपेक्षता की छद्म परिभाषा की तरह ही अल्पसंख्यक की परिभाषा गढ़ी गई,2014 के चुनावों से ये मिथक टुटा की सत्ता तुष्टीकरण से ही मिलेगी,2019 ,2024 और राज्यों के चुनाव परिणामों ने ये स्थापित कर दिया की सत्ता बिना तुष्टीकरण के जीतीं ही नही कायम भी रखी जा सकती है।
फतवों की कहानी बेमानी हों गई, महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भर -भर के फतवें जारी हुए लोगों ने भर -भर के एनडीए को वोट दिया, उत्तर प्रदेश और आसाम में एनडीए की सरकारें कायम रहीं देश के अधिकांश राज्यों एवं केंद्र में एनडीए की सरकारें हैं,बंगाल ही अपवाद है ,जिसके मिथक को तोड़ने भाजपा प्रयासरत है,सत्ता से दूर विपक्षियों ने अपना दुराग्रह और दुष्प्रचार मुस्लिमों के बीच खूब किया ,खुद तो सत्ता से दूर हुए ,मुस्लिमों की सत्ता सहभागिता भी कम करवा दी, यदि कोई समाज मतदान में भी फतवे का परिपालन कर एकतरफा मतदान करें तो उसे सहभागिता सत्ता में कैसे मिलेगी ? संचार के इस आधुनिक युग में आचार -विचार व्यवहार छिप नही सकते ,जो बोले सपाई,कांग्रेसी ,कम्युनिस्ट विपक्षी सारें और ओवैसी भाई उसने देश की जनता को वास्तविकता से अवगत होने का मौका दिया ,देश ने देखा की मुस्लिम प्रेम की मदांधता में दुसरे धर्मो का अपमान सालों से होता आ रहा है, और आगे भी इनका यही इरादा है,ऐसे इरादों को कौन परवान चढ़ाएगा अभी तों धर्म स्थल कानून पर भी समीक्षा होगी ,संसद में बिगड़ी दशा ही नही सुधारी जाएगी दिशा भी सुधारी जाएगी ,समानता यदि संवैधानिक अधिकार है तो संसद को इसकी रक्षा करने ही होगी,विपक्ष ने जों खेल अबतक धर्म निरपेक्षता के नाम पर खेला वो खेला अब होगा नही ,सत्ता बहुमत की बंधक है बहुमत का अपमान कर आप ना सत्ता पाएंगे ना सम्मान,वक्फ बिल पारित होने के बाद ना आप मुस्लिमों को बहका पाएंगे ,ना वों आपके बहकावे में आयेंगे,दौरे ए बहकावा ख़त्म हुआ ,मुस्लिमों में भी अब अस्मिता का आगाज हुआ-----------------------------------वक्फ संशोधन करेगा भारतीय राजनीति का शोधन
चोखेलाल
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मुखिया के मुखारी व्यवस्था पर चोट करती चोखेलाल की टिप्पणी
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