मेडिकल के 5 यूनीक कोर्स, MBBS से है हटकर ,जानें एडमिशन प्रक्रिया.

मेडिकल के 5 यूनीक कोर्स, MBBS से है हटकर ,जानें एडमिशन प्रक्रिया.

नई दिल्ली  : मेडिकल की पढ़ाई बहुत कठिन मानी जाती है. मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए नीट पास करना जरूरी है. मेडिकल कोर्स लिस्ट में एमबीबीएस को सबसे कठिन कोर्स का दर्जा दिया गया है. अगर आपके नीट में कम स्कोर रह जाते हैं तो आप मेडिकल के उन कोर्सेस में एडमिशन ले सकते हैं, जो एमबीबीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस आदि से हटकर हैं. इन्हें यूनीक मेडिकल कोर्स कहा जाता है.

मेडिकल फील्ड में कई कोर्स ऐसे हैं जो न केवल यूनीक और कम चर्चित हैं, बल्कि उभरते हुए क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्रदान करते हैं. ये कोर्स पारंपरिक MBBS या नर्सिंग से हटकर हैं और अक्सर लोगों को इनके बारे में कम जानकारी होती है. नीचे 5 सबसे यूनीक मेडिकल कोर्स की लिस्ट दी गई है, जो सामान्य स्टूडेंट्स के लिए हैं और इनके बारे में आमतौर पर कम लोग जानते हैं. कॉम्पिटीशन लेवल कम होने की वजह से इनमें एडमिशन आसानी से मिल जाएगा.

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1. बैचलर ऑफ साइंस इन न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलॉजी (B.Sc. in Neuroelectrophysiology)
यह कोर्स ब्रेन और नर्वस सिस्टम की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटीज (जैसे EEG, EMG) का अध्ययन और निदान सिखाता है. इसमें न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (जैसे मिर्गी, स्लीप डिसऑर्डर और ब्रेन इंजरी) की जांच के लिए डिवाइसेस का इस्तेमाल किया जाता है.

क्यों यूनीक: न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलॉजी एक विशेष पैरामेडिकल क्षेत्र है, जो न्यूरोसाइंस और टेक्नोलॉजी का कॉम्बिनेशन है. यह MBBS न्यूरोलॉजिस्ट से अलग है और कम प्रतिस्पर्धी है. भारत में इसके बारे में कम लोग जानते हैं.

अवधि: 3-4 वर्ष (B.Sc. डिग्री)

करियर स्कोप
नौकरी: अस्पतालों, न्यूरोलॉजी क्लिनिक्स या रिसर्च लैब्स में न्यूरोफिजियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट. शुरुआती सैलरी 25,000-50,000 रुपये प्रति माह. विदेशों (USA, UK) में डिमांड ज्यादा है.

रिसर्च: न्यूरोसाइंस रिसर्च में योगदान, जैसे ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस या AI-आधारित न्यूरो डायग्नोस्टिक्स.

कहां से करें: एम्स दिल्ली, NIMHANS बेंगलुरु या Christian Medical College (CMC) वेल्लोर.

एडमिशन: 12वीं (PCB) में 50-60% अंक, कुछ इंस्टीट्यूट में एंट्रेंस टेस्ट भी होता है.

2. बैचलर ऑफ साइंस इन मेडिकल जेनेटिक्स (B.Sc. in Medical Genetics)
यह कोर्स जेनेटिक डिसऑर्डर, DNA टेस्टिंग और जेनेटिक काउंसलिंग पर फोकस्ड है. इसके सिलेबस में जेनेटिक म्यूटेशन, कैंसर जेनेटिक्स और रेयर डिजीज का अध्ययन शामिल है.

क्यों यूनीक: मेडिकल जेनेटिक्स एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जो पर्सनलाइज्ड मेडिसिन और जेनेटिक थेरेपी से जुड़ा है. भारत में बहुत कम संस्थान यह कोर्स ऑफर करते हैं. इसके बारे में जागरूकता कम है.

अवधि: 3 वर्ष

करियर स्कोप
नौकरी: जेनेटिक लैब्स, अस्पतालों या डायग्नोस्टिक सेंटर्स में जेनेटिक टेक्नोलॉजिस्ट या काउंसलर. शुरुआती सैलरी 30,000-60,000 रुपये प्रति माह.

रिसर्च/बिजनेस: जेनेटिक रिसर्च, बायोटेक स्टार्टअप्स या जेनेटिक काउंसलिंग क्लिनिक शुरू करने का अवसर.

कहां से करें: मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, एसआरएम इंस्टीट्यूट चेन्नई या एमिटी यूनिवर्सिटी.

एडमिशन: 50-60% अंकों के साथ 12वीं (PCB) पास, कुछ जगहों पर एंट्रेंस टेस्ट भी होता है.

3. बैचलर ऑफ साइंस इन न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी (B.Sc. in Nuclear Medicine Technology)
यह कोर्स रेडियोएक्टिव आइसोटोप्स का इस्तेमाल करके कैंसर, हृदय रोग और अन्य बीमारियों का निदान और उपचार सिखाता है. इसमें PET स्कैन और रेडियोथेरेपी जैसे क्षेत्र शामिल हैं.

क्यों यूनीक: न्यूक्लियर मेडिसिन एक बहुत मॉडर्न क्षेत्र है, जो मेडिकल इमेजिंग और थेरेपी को मिलाता है. भारत में इसके विशेषज्ञों की कमी है. यह कोर्स कम संस्थानों में उपलब्ध है.

अवधि: 3-4 वर्ष

करियर स्कोप
नौकरी: अस्पतालों, कैंसर सेंटर्स या डायग्नोस्टिक लैब्स में न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजिस्ट. शुरुआती सैलरी 40,000-80,000 रुपये प्रति माह. विदेशों में उच्च मांग.

रिसर्च: रेडियोफार्मास्यूटिकल्स या न्यूक्लियर इमेजिंग टेक्नोलॉजी में रिसर्च.

कहां से करें: एम्स दिल्ली, PGIMER चंडीगढ़ या टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई.

एडमिशन: 60% अंकों के साथ 12वीं (PCB) पास, एंट्रेंस टेस्ट अनिवार्य.

4. बैचलर ऑफ साइंस इन स्पोर्ट्स मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (B.Sc. in Sports Medicine and Rehabilitation)
यह कोर्स खेल से संबंधित चोटों, रिहैबिलिटेशन और फिटनेस मैनेजमेंट पर फोकस करता है. इसमें फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन और इंजरी प्रिवेंशन शामिल है.

क्यों यूनीक: स्पोर्ट्स मेडिसिन भारत में नया और तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है, खासकर क्रिकेट, फुटबॉल, और ओलंपिक्स जैसे खेलों के बढ़ते महत्व के साथ. यह पारंपरिक मेडिकल कोर्स से अलग है और स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से जुड़ा है.

अवधि: 3-4 वर्ष

करियर स्कोप
नौकरी: स्पोर्ट्स टीम्स, फिटनेस सेंटर्स या रिहैब क्लिनिक्स में स्पोर्ट्स थेरेपिस्ट या रिहैबिलिटेशन स्पेशलिस्ट. शुरुआती सैलरी 25,000-50,000 रुपये प्रति माह.

बिजनेस: स्पोर्ट्स रिहैब सेंटर या फिटनेस कंसल्टिंग बिजनेस शुरू किया जा सकता है.

कहां से करें: गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर, नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स पटियाला या सिम्बायोसिस पुणे.

एडमिशन: 50-60% अंकों के साथ 12वीं (PCB) पास, कुछ जगह एंट्रेंस टेस्ट.

5. बैचलर ऑफ साइंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर (B.Sc. in Artificial Intelligence in Healthcare)
यह कोर्स मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, इमेजिंग और पेशेंट केयर में AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल सिखाता है. इसमें AI-आधारित टूल्स (जैसे डिजीज प्रेडिक्शन और मेडिकल डेटा एनालिसिस) शामिल हैं

क्यों यूनीक: AI का हेल्थकेयर में इस्तेमाल एक क्रांतिकारी और उभरता हुआ क्षेत्र है. यह मेडिसिन और टेक्नोलॉजी का कॉम्बिनेशन है. भारत में इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं. यह उन लोगों के लिए बेस्ट है, जो टेक और मेडिसिन, दोनों में रुचि रखते हैं.

अवधि: 3-4 वर्ष

करियर स्कोप
नौकरी: हेल्थकेयर स्टार्टअप्स, अस्पतालों या बायोटेक कंपनियों में AI हेल्थकेयर स्पेशलिस्ट. शुरुआती सैलरी 50,000-1,00,000 रुपये प्रति माह. विदेशों में बहुत डिमांड है.

रिसर्च/बिजनेस: AI-आधारित हेल्थकेयर स्टार्टअप या डायग्नोस्टिक टूल्स डेवलपमेंट.

कहां से करें: आईआईटी हैदराबाद, एमिटी यूनिवर्सिटी या मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीमित संस्थानों में उपलब्ध).

एडमिशन: 60% अंकों के साथ 12वीं (PCB या PCM), एंट्रेंस टेस्ट या मेरिट बेस्ड.

काम की बात
1- ये कोर्स मध्यम से उच्च लागत (50,000-5 लाख रुपये) और 3-4 वर्ष की अवधि के हैं. लागत संस्थान पर निर्भर करती है.

2- अगर स्टूडेंट मास्टर्स या रिसर्च में जाना चाहे तो इन कोर्स के बाद M.Sc., MPH या Ph.D. जैसे विकल्प उपलब्ध हैं.

3- विदेशों में इन कोर्स की डिमांड ज्यादा है. इसलिए इंटरनेशनल सर्टिफिकेशन (जैसे ARRT न्यूक्लियर मेडिसिन के लिए) पर विचार कर सकते हैं.

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