जांजगीर-चाम्पा : जिला चिकित्सालय के रिकॉर्ड रूम में शनिवार रविवार की दरमियानी रात लगी संदिग्ध आग ने एक बार फिर जिले में सरकारी व्यवस्थाओं और जांच प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आग ने जहाँ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों को राख में बदल दिया, वहीं इस घटना ने कई पुराने मामलों और हालिया विवादों को भी हवा दे दी है।
सूत्रों के अनुसार, जिस समय आग लगी, उस समय अस्पताल के सभी विद्युत उपकरण सामान्य रूप से कार्य कर रहे थे। इलेक्ट्रिशियन का कहना है कि वायरिंग हाल ही में बदली गई थी और शॉर्ट सर्किट की संभावना नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि आग आखिर कैसे लगी? और यदि यह दुर्घटना नहीं, साजिश थी, तो बीड़ी और लाइटर लेकर रिकॉर्ड रूम में कौन गया?
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किसकी थी जिम्मेदारी?
रिकॉर्ड रूम जैसी संवेदनशील जगह की ज़िम्मेदारी किस अधिकारी पर थी? आगजनी की इस घटना से पहले और बाद की घटनाओं की पड़ताल की जाए तो इसमें गहरी साजिश की बू आ रही है।
भर्ती घोटाले की आंच और आगजनी का संयोग
पूर्व सिविल सर्जन के स्थानांतरण के बाद, जीवनदीप समिति के तहत की गई नियुक्तियों पर पहले ही सवाल उठाए जा रहे थे। न तो इनकी पात्र/अपात्र सूची सार्वजनिक की गई, न ही भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को सुनिश्चित किया गया। कुछ भर्तियां विज्ञापन के बिना ही की गईं और दूसरे जिलों के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी गई। जैसे ही यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, अस्पताल के रिकॉर्ड रूम में आग लगना एक संयोग से अधिक साजिश प्रतीत हो रहा है।
वित्तीय अनियमितताओं की आशंका
सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात वित्त से संबंधित बाबुओं और उनके परिवारजनों के बैंक खातों की गहन जांच की माँग तेज़ हो रही है। यह आशंका है कि दस्तावेज़ों की राख में कुछ बड़े घोटालों के सबूत भी जलाए गए हैं।
CCTV फुटेज अब तक क्यों नहीं हुआ सार्वजनिक?
घटना के बाद से अब तक CCTV फुटेज सार्वजनिक नहीं किया गया है, जो प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाता है। यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो फुटेज में छुपाने जैसा क्या है?
जनता और जागरूक नागरिकों की मांग
सिविल सर्जन कार्यालय से सभी वित्तीय बाबुओं को हटाया जाए
बैंक खातों और संपत्तियों की जांच हो
भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए
आगजनी की घटना में शामिल संदिग्धों की पहचान की जाए और कार्रवाई हो
जिले की जनता अब यह जानना चाहती है कि क्या यह जांच भी पूर्व की तरह मज़ाक बन कर रह जाएगी, या फिर इस बार अपराधियों को सजा दिलाई जाएगी। प्रशासन के सामने यह एक अग्निपरीक्षा है और यह देखने की बात होगी कि न्याय की लौ इस आग के धुएं में गुम हो जाती है या इससे और तेज़ जल उठती है।

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