राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ 25 अधिकारियों की मांग,विरोध में उतरा नगरीय प्रशासनिक सेवा संघ

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ 25 अधिकारियों की मांग,विरोध में उतरा नगरीय प्रशासनिक सेवा संघ

रायपुर :  नगरीय प्रशासन विभाग की जीएडी को लिखी चिट्टी से स्थानीय निकाय के राज्य सेवा संवर्ग के अधिकारियों को लामबंद कर दिया है। दरअसल नगरीय प्रशासन विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर डेपुटेशन में 25 अधिकारियों को देने की मांग की है। डेपुटेशन में मिलने वाले अफसरों को प्रदेश के नगर निगमों में महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी सौंपने की योजना बनाई है। विभाग की इस योजना की भनक लगते ही छत्तीसगढ़ नगरीय प्रशासनिक सेवा संघ ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। डिप्टी सीएम व नगरीय प्रशासन मंत्री को पत्र लिखकर ना केवल कड़ा विरोध दर्ज कराया है साथ ही अपनी मांगे भी मंत्री के सामने रख दी है।

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डिप्टी सीएम व नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव को लिखे पत्र में संघ ने कहा है कि हमें पता चला है कि नगर निगम के अपर आयुक्त, उपायुक्त, जोन आयुक्त के पद पर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ करने हेतु 25 अधिकारियों की मांग सामान्य प्रशासन विभाग से करने हेतु शासन को संचालनालय द्वारा पत्र प्रेषित किया गया है। संघ ने आशंका जताते हुए लिखा है कि यदि यह व्यवस्था मूर्त रूप लेती है तो हम सब विभागीय अधिकारियों के साथ अन्याय होगा।

 संघ ने आगे लिखा है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाने की कार्यवाही को स्थगित रखते हुए हमें ही कार्य करने का अवसर प्रदान करें जिससे हमारा मनोबल एवं प्रशासनिक क्षमता का और विकास हो सके तथा शासन को इसका अधिकाधिक लाभ मिल सके। संघ के अनुसार छ.ग. नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 87 अनुसार मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की नियुक्त्ति राज्य शासन द्वारा लोक सेवा आयोग के माध्यम से किया जाता है व राज्य स्तर पर राजपत्रित श्रेणी व सीधी भर्ती का एक मात्र पद है व राज्य द्वार समय-समय पर अपने आदेश निर्देश पर अलग-अलग शाखाओं में पदस्थ कर कार्य लिया जाता है।

हम हैं काबिल, चला सकते हैं नगर निगम

संघ ने पत्र में लिखा है कि हम सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारी MPPSC एवं CGPSC से चयनित होकर आए हैं तथा अपनी सेवाएं नगर निग, नगर पालिका में पूर्ण सजगता, ईमानदारी एवं लगन से दे रहे हैं। वर्ष 2002 से 2015 तक हमारे कैडर के कतिपय विभिन्न नगर निगम जैसे चिरमिरी, अंबिकापुर, राजनांदगांव, रायगढ़, दुर्ग, जगदलपुर, भिलाई चरौदा, कोरबा आदि में अपनी सेवाएं आयुक्त के रूप में दे चुके है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर निगम, नगर पालिका के कार्यों को पूर्व से ही भलीभांति समझते है तथा अनुभव के आधार पर जनप्रतिनिधियों से सामन्जस्य स्थापित कर कार्य को संपादित करते है। साथ ही शासन के विभिन्न योजनाओं एवं निर्देशों का पालन अपने अधिनस्थ कर्मचारियों से कराने में सक्षम है।

राज्य के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों ने मंत्री के सामने रखी ये मांगे

वरिष्ठ CMO को आयुक्त पद पर पदस्थापना किया जाए, जिससे अनुभव व सेवा का उचित सम्मान हो और नगरों में प्रशासनिक नेतृत्व को मजबूती मिलें।

मध्यप्रदेश की तर्ज पर कैडर का गठन किया जाए, जिससे सेवा की निरंतरता, पदोन्नति एवं स्थानांतरण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सके।

ग श्रेणी के अधिकारियों को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा प्रदान किया जाए, जिससे उनके कार्यो को संस्थागत मान्यता प्राप्त हो।

अपर संचालक (नगरीय प्रशासन) में एक पद विभागीय अधिकारियों के लिए आरक्षित किया जाए एवं SUDA में अपर मुख्य कार्यपालन अधिकारी का पद विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों हेतु सुनिश्चित किया जाए, जिससे विभागीय अधिकारियों को वरिष्ठ पदों तक पहुँच का अवसर मिले।

मंत्रालय स्तर पर OSD (Officer on Special Duty) एवं अवर सचिव के रूप में विभागीय अधिारियों की पद स्थापना की जाए, जिससे नितियों के निर्माण में व्यवहारिक नीतियों का समावेश हो सके।

पुरानी पेशन योजना 0PS को पुनः लागू किया जाए, जिससे कर्मचारियों कों अर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा प्राप्त हो।

मध्यप्रदेश की तर्ज पर नगर निगम अधिनियम 1956 एवं नगर पालिका अधिनियम 1961 को मर्ज किया जाए, जिससे एकरूपता, स्पष्टता एवं विधिक सुदृढ़ता सुनिश्चित की जा सके।

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