जैविक खेती से आई समृद्धि,हल्दी, सफेद मूसली और पपीता की खेती करने से किसानों की  बढ़ रही आर्थिक मजबूती

जैविक खेती से आई समृद्धि,हल्दी, सफेद मूसली और पपीता की खेती करने से किसानों की बढ़ रही आर्थिक मजबूती

हल्दी,सफेद मूसली और पपीता की खेती से आई समृद्धि – परम्परागत खेती के साथ यदि उद्यानिकी फसलों को उगाया जाए तो न केवल आर्थिक मजबूती मिलती है , बल्कि समृद्धि भी जल्दी आती है। इस बात को साबित किया है खरगोन जिले के ग्राम नांद्रा के युवा कृषक 26 वर्षीय श्री चंद्रशेखर राठौड़ ने। जीव विज्ञान में स्नातक श्री राठौड़  परम्परागत खेती रासायनिक तरीके से  वहीं  हल्दी , सफेद मूसली और पपीता की जैविक खेती करते हैं। उद्यानिकी फसलों से होने वाली आय ने उन्हें आर्थिक मजबूती प्रदान कर समृद्धि की ओर अग्रसर किया है।

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राठौड़ ने कृषक जगत को बताया कि परम्परागत खेती के अलावा स्वर्गीय दादाजी द्वारा पांच दशक  पूर्व तब हल्दी की खेती की जाती थी , जब क्षेत्र में इसे कोई नहीं जानता था। उसी परम्परा का अब भी निर्वाह किया जा रहा है। संयुक्त परिवार द्वारा 50 एकड़ में खेती की जाती है।  हल्दी के लिए वही पुराना बीज इस्तेमाल किया जा रहा है और उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है। गत वर्ष गीली हल्दी का करीब 70 – 80 क्विंटल / बीघा का और पाउडर हल्दी का 7 -10 क्विंटल / बीघा का उत्पादन मिला था। पाउडर हल्दी 200 रु / किलो की दर से घर से ही बेच देते हैं ।  जबकि जैविक हल्दी  पाउडर की कीमत बाजार में अधिक है।ग्राहकी बंधी होने से बेचने की चिंता नहीं रहती है। इसी तरह चार साल पहले सफेद मूसली का 10 किलो बीज खरीद कर सफेद मूसली की जैविक खेती की शुरुआत  की थी, जो अब भी जारी है। सफेद मूसली की फसल भी खेत से ही बिक जाती है। इस साल भी 4 बीघा में सफेद मूसली 1 जून को लगाई जाएगी।

श्री चंद्रशेखर ने बताया कि  विगत 5 वर्षों से पपीता की भी खेती करते हैं। रेड लेडी 786 किस्म के करीब साढ़े 6 हज़ार पौधे लगाए गए हैं। गत वर्ष भी पपीता फसल का अच्छा उत्पादन मिला और खर्च काटकर करीब डेढ़ लाख की शुद्ध बचत हुई थी। उद्यानिकी फसलों को  आसपास  के व्यापारी खेत पर आकर ही खरीद लेते हैं , जिससे परिवहन और अन्य खर्च की बचत हो जाती है। उद्यानिकी फसलों में इन्हें उद्यानिकी एवं आत्मा परियोजना से मार्गदर्शन मिलता रहता है। ये जैविक प्रतिभा सिंटेक्स  से 2011 से जुड़े हुए हैं। जैविक प्रमाणीकरण संस्था में पंजीयन की प्रक्रिया लंबित है। आत्मा परियोजना द्वारा इन्हें नवाचार के तहत प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। 

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