इस विधि से करें हल्दी की जैविक खेती,होगा जबरदस्त मुनाफा

इस विधि से करें हल्दी की जैविक खेती,होगा जबरदस्त मुनाफा

हल्दी, जिसे भारतीय केसर के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खेती से किसान जबरदस्त मुनाफा कमा सकते हैं। यह भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा है, जिसके कारण यह सालभर डिमांड में बनी रहती है। बल्कि इसके औषधीय गुणों के कारण वैश्विक स्तर पर भी लोकप्रिय है। जैविक हल्दी की खेती न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि यह किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय भी साबित हो सकता है।जैविक खेती पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ तरीका है। खेती के इस तरीके में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होता।

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हल्दी की जैविक खेती के लिए इन बातों का रखें ध्यान

1. मिट्टी और जलवायु की तैयारी

हल्दी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली, दोमट या बलुई दोमट मिट्टी का इस्तेमाल करें। इसके लिए मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 7.5 होना चाहिए।

2. जलवायु

इसके लिए 20-30 डिग्री सेल्सियस जलवायु की आवश्यकता होती है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए जैविक खाद (गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट, नीम खली) का इस्तेमाल करें।
3. हल्दी की गांठ का चयन

हमेशा स्वस्थ, रोगमुक्त और जैविक रूप से उगाई गई हल्दी की गांठ का चुनाव करें। गांठें मध्यम आकार की और 2-3 आंखों (कलियों) वाली होनी चाहिए। बुवाई करने से पहले गांठों को गोमूत्र या जैविक फफूंदनाशक से उपचारित करें।

4. खेत को करें तैयार

खेतों की जुताई करने के बाद जैविक खाद डालें। इसके बाद 30-45 सेमी की दूरी पर मेड़ (रिज) बनाएं। खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

5. बुआई का समय

भारत में हल्दी की बुआई मई-जून के बीच की जाती है। पंक्तियों के बीच 30-45 सेमी और पौधों के बीच 15-20 सेमी की दूरी रखें। गांठों को 5-7 सेमी गहराई में बोएं। एक हेक्टेयर ज़मीन में 20-25 क्विंटल गांठों की आवश्यकता होती है।

6. सिंचाई का समय

हल्दी की फसल को नमी की आवश्यकता होती है। मानसून में अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत नहीं, लेकिन शुष्क मौसम में 7-10 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें। सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक का इस्तेमाल करें।

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इन बातों का रखें विशेष ध्यान -

1. बुआई के 30-60 दिन बाद खरपतवार हटाने के लिए हल्की निराई-गुड़ाई करें।
2. समय पर कीट और रोग प्रबंधन करने से उत्पादन बढ़ सकता है।

3. फसल चक्र अपनाएं (हल्दी के बाद मूंग, चना या अन्य फसलें उगाएं)।
4. हल्दी 7-9 महीने में पककर तैयार होती है। जब पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें, तब कटाई करें।







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