भगोड़े परदेशियों की अब तक नहीं मिला सुराग, धरती खा गई या आसमान निगल गया या कोई और बात है?

भगोड़े परदेशियों की अब तक नहीं मिला सुराग, धरती खा गई या आसमान निगल गया या कोई और बात है?

रायपुर :  परदेशिया एंड कंपनी के वीरेंद्र और रोहित ने अंग्रेजों के काला पानी को भी मात दे दिया है। एक रुपया देकर एक हजार वसूलने के लिए मसल पावर का इस्तेमाल करते थे। किसी की भी बेशकीमती जमीन को हड़प लेना इसके लिए मामूली बात है। 

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सूदखोरों ने कर्जदारों की सूची बना रखी है जिससे हर महीने उनके गुंडे जाकर वसूली करते थे. यदि कोई कहे कि मेरा कर्ज पट गया पैसे देने में न नुकुर करे तो उसे पकड़ कर हवेली में ले जाकर तबीयत से फोड़ाई करते थे। कई फार्महाऊस में बी अड्डा बना रखा है, जहां लोगों को जबरन पकड़ या यो कहे अपहरण कर ले जाते थे और महीने तक उसकी पिटाई करते थे।

मारपीट, सूदखोरी तथा घर में हथियार बरामद होने के मामले में अपराध दर्ज होने के बाद वीरेंद्र तथा रोहित तोमर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए हैं। आरोपियों की पतासाजी करने पुलिस उनके छिपने के संभावित ठिकानों पर छापे की कार्रवाई कर रही है, बावजूद इसके दोनों भाई पुलिस पकड़ से बाहर सूदखोरी मामले में रोहित तथा वीरेंद्र की पत्नी को भी पुलिस ने आरोपी बनाया है, लेकिन उन्हें अब तक पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया है। सूदखोरी की रकम तथा ज्यादातर प्रापर्टी गुर्गों के नाम घर को बनाया था अभेद्य किला पुलिस की किसी भी तरह की कार्रवाई से बचने तोमर भाइयों ने अपने घर को अभेद्य किला बनाया था। सुरक्षा के लिहाज से घर के पुलिस को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक वीरेंद्र तथा रोहित ने अपनी सूदखोरी की दुकान चलाने के साथ लोगों को धमकाने के लिए 37 के करीब गुंडे पाल रखे थे, इनमें से 27 गायब हैं। पुलिस उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।

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