बजरमुड़ा घोटाला : स्थानीय स्तर पर सुलझाने के बजाय और उलझाया जा रहा

बजरमुड़ा घोटाला : स्थानीय स्तर पर सुलझाने के बजाय और उलझाया जा रहा

रायगढ़ : बजरमुड़ा घोटाले को स्थानीय स्तर पर सुलझाने के बजाय और उलझाया जा रहा है। किसी भी तरह से समस्त प्रमाणों को नष्ट करने की नीयत है। 108 हे. भूमि की पुनर्गणना की गई जिसमें संशोधित मुआवजा 80.43 करोड़ का बनाया गया, लेकिन इन्हीं खसरों का मुआवजा कितना बांटा गया, इसका जिक्र नहीं है। शासन को कितनी हानि हुई इसकी गणना तो की ही नहीं गई। उस पर से डेढ़ साल पहले हुई जांच रिपोर्ट से ज्यादा पेड़ पुनर्गणना में बता दिए।सीएसपीजीसीएल को आवंटित कोल ब्लॉक गारे पेलमा सेक्टर 3 में मिलूपारा, करवाही, खम्हरिया, ढोलनारा और बजरमुड़ा में 449.166 हे. पर लीज स्वीकृत की गई। इसमें लीज क्षेत्र के अंतर्गत 362.719 हे. और बाहर 38.623 हे. भूमि पर सरफेस राइट के तहत भूअर्जन किया गया।

तत्कालीन एसडीएम घरघोड़ा ने भू-अर्जन किया। जुलाई 2020 को प्रारंभिक सूचना प्रकाशित की गई। इश्तहार प्रकाशन के बाद भूमिस्वामियों की आपत्ति आई। 22 जनवरी 2021 को अवार्ड पारित किया गया। इसमें केवल बजरमुड़ा के 170 हे. भूमि पर 478.68 करोड़ का मुआवजा पारित किया गया। सीएसपीजीसीएल ने अवार्ड राशि से क्षुब्ध होकर कलेक्टर के समक्ष अपील की जिसके बाद केवल ब्याज को 32 माह से घटाकर 6 माह का किया गया। इसके बाद मुआवजा 415.69 करोड़ हो गया। राज्य स्तरीय जांच टीम ने हर भूमि में जाकर मौका निरीक्षण किया। अब सीएसपीजीसीएल ने प्रोजेक्ट का विस्तार करने के लिए 111 हे. पर भू प्रवेश की अनुमति मांगी।

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यह वही भूमि थी जिस पर गड़बड़ी हुई और कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। लेकिन एसडीएम घरघोड़ा ने पूर्व कलेक्टर को अंधेरे में रखते हुए केवल इतनी ही भूमि पर पुनर्गणना करवाई, जबकि पूरी भूमि पर पुनर्गणना करने के बाद एफआईआर कराना पहली प्राथमिकता है। कुल 57 खातेदारों के खसरा नंबरों की जांच के बाद 108.784 हे. पर निजी भूमि का मुआवजा 75.93 करोड़, परिसंपत्तियों का प्रतिकर 1.99 करोड़ और वृक्षों का मुआवजा 2.50 करोड़ तय किया गया है। इस तरह कुल 80.43 करोड़ का मुआवजा बना है। अभी भी करीब 62 हे. की पुनर्गणना नहीं हो सकी है। यह भी नहीं बताया गया है कि पूर्व में इस 108 हे. पर कितना मुआवजा बांटा गया है। 

जब दिसंबर 2023 में आईएएस रमेश शर्मा की टीम ने जांच की थी तो कई भूमियों पर पेड़ ही नहीं मिले थे। इसका उल्लेख उन्होंने रिपोर्ट में किया है। उदाहरण के तौर पर खसरा नंबर 160 रकबा 0.376 हे. भूमिस्वामी खेमानिधि वगैरह की जमीन पर जांच टीम ने आम के दस पौधे, एक सेम्हर पेड़, फरसा 3 और नीम के दो पेड़ पाए थे। मुआवजा पत्रक में आम के 113 पेड़, आम पौधा 1397, फरसा 8 दर्ज कर करीब 16 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया। अब पुनर्गणना में तमनार तहसीलदार ने जमीन पर आम का एक पेड़, आम पौधा 5 के अलावा नीम पेड़ चार, आम ठूंठ एक मिलाकर 19 छोटे-बड़े पेड़ गिन लिए। इनकी मुआवजा गणना भी हो गई। सवाल यह है कि जो पेड़ बाद में उगे, उनका भी मुआवजा जोड़ लिया गया।

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