गरियाबंद : जिला मुख्यालय स्थित आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में बच्चों की पढ़ाई के हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। स्कूल शुरू करने के पीछे सरकार की मंशा थी कि प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को सरकारी व्यवस्था में ही मिल सके, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र भी बेहतर माहौल में पढ़ाई कर सकें। मगर हकीकत में हालात ऐसे बन गए हैं कि पुराने जर्जर स्कूलों जैसी परेशानियां अब आत्मानंद स्कूल में भी देखने को मिल रही हैं।
प्राइमरी विंग में दो बच्चों के बैठने की टेबल पर तीन-तीन बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है। कई बार तो सीट की इतनी कमी हो जाती है कि छात्रों को खड़े रहकर ही पढ़ाई करनी पड़ती है। इससे बच्चों की पढ़ाई का माहौल पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
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स्कूल के क्लासरूम में बिजली गुल होते ही अंधेरा छा जाता है, जिससे मजबूरी में खिड़कियां खोलनी पड़ती हैं। मगर खिड़कियों के बाहर गंदगी और कचरा जमा है, जिससे बदबू के साथ-साथ जीव-जंतुओं के अंदर आने का भी खतरा बढ़ गया है। यह स्थिति बच्चों की सेहत पर भी असर डाल सकती है।
चेयर की कमी के चलते कई बच्चों को वेटिंग चेयर पर बैठाया जा रहा है, जहां पढ़ने और लिखने के लिए टेबल भी नहीं हैं। बच्चे कॉपी एक हाथ में पकड़कर दूसरे हाथ से लिखने को मजबूर हैं। इससे पढ़ाई में और ज्यादा परेशानी खड़ी हो रही है।
स्कूल के प्रिंसिपल ने भी माना कि क्लासरूम में जगह की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि अगर कुछ और कमरे बन जाएं, तो बच्चों को बैठने और पढ़ने में आसानी हो सकती है।
सबसे बड़ी समस्या ओवर-एडमिशन की है। स्कूल में 50 सीटों की क्षमता के बावजूद 55-60 बच्चों का एडमिशन कर लिया गया है। वहीं शासन द्वारा बच्चों के लिए भेजी जाने वाली किताबें भी सिर्फ 50 के हिसाब से आती हैं, जिससे बाकी बच्चों को किताबें ही नहीं मिल पा रहीं और उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है।
ऐसे हालात में सवाल उठ रहा है कि क्या आत्मानंद स्कूल भी पुराने सरकारी स्कूलों के जैसी दुर्दशा का शिकार हो जाएगा या फिर जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देकर व्यवस्था सुधारेंगे?

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