18 दिन तक अंतरिक्ष में रहने के बाद शुभांशू शुक्ला और Axiom-4 मिशन पर गए क्रू की अंतरिक्ष से धरती पर वापसी हो रही है। आज यानी सोमवार 14 जुलाई को शाम 4 बजे Axiom-4 का क्रू इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के धरती की ओर लौटेगा। इस क्रू में भारत के शुभांशू शुक्ला के अलावा तीन और अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। धरती पर लौटने से पहले इस मिशन पर गए स्पेसक्राफ्ट की Undocking प्रक्रिया शुरू होगी। आइए, जानते हैं इसके बारे में...
क्या है Undocking?
जब दो आपस में जुड़े अंतरिक्षयान एक-दूसरे से अलग होते हैं, तो इस प्रक्रिया को Undocking कहा जाता है। इसमें तीन स्टेप्स होते है, जिनमें पहले रिलीज की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके बाद सेपरेशन यानी अलग होने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें अंतरिक्षयान का थ्रस्टर फायर उसे दूसरे स्पेसक्राफ्ट से अलग करना शुरू करेगा।
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इसके बाद अलग हुआ अंतरिक्षयान एक सुरक्षित दूरी बनाएगी, ताकि दोनों अंतरिक्षयान आपस में न टकरा सके। इस तरह से पूरी Undocking प्रक्रिया पूरी होती है। ये तीनों स्टेप्स के पूरा होने के बाद अंतरिक्षयान धरती की ओर रवाना होगी।
शुभांशू शुक्ला भारत के दूसरे अंतरिक्षयात्री हैं, जिन्हें अंतरिक्षयात्रा का अनुभव प्राप्त हुआ है। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने चांद पर उतरने का काम किया था। शुभांशू शुक्ला आज 14 जुलाई को दिन के 2 बजे अपने अंतरिक्षयान Dragon में बैठेंगे।
इसके दो घंटे के बाद यानी 4 बजे Undoking की प्रक्रिया शुरू होगी। Undoking प्रक्रिया पूरी होने के बाद ISS से धरती की 22.5 घंटे की लंबी यात्रा शुरू होगी। वो कल यानी मंगलवार दिन के 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर लैंड करेंगे। इसके लिए SPACE-X की टीम पहले सी है तैनात हैं, ताकि इस मिशन पर गए सभी अंतरिक्षयात्रियों की सुरक्षित धरती पर लैंडिंग हो सके।
रविवार 13 जुलाई को ISS पर मौजूद 73 अंतरिक्षयात्रियों ने शुभांशू शुक्ला और उनके साथ गए Axiom-4 की टीम के लिए फेयरवेल का आयोजन किया था। इस दौरान भारतीय अंतरिक्षयात्री ने कहा 'जल्दी ही धरती पे मुलाकात करते हैं।'
यही नहीं शुभांशू शुक्ला ने 41 साल पहले गए भारतीय अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा को याद करते हुए कहा, 'हम अभी भी इसे लेकर उत्सुक हैं कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है? आज का भारत महत्वाकांक्षी तिखता है। आज का भारत निडर दिखता है। आज का भारत कॉन्फिडेंट दिखता है। आज का भारत गर्व से पूर्ण दिखता है।' 'इन सब वजहों से मैं एक बार फिर से कहना चाहता हूं आज का भारत अभी भी सारे जहां से अच्छा है।'
इस तरह होगी सुरक्षित लैंडिंग
Axiom-4 मिशन पर भेजा गया अंतरिक्षयान Dragon पूरी तरह से ऑटोनोमस है और अनडॉकिंग की प्रक्रिया भी अपने आप शुरू होगी। Undocking के बाद एक सुरक्षित दूरी पर पहुंचते ही Draogon Spacedraft के इंजन में आग लगेगी और यह धरती की तरफ रवाना होगा। धरती के वातावरण में पहुंचने के बाद कैप्सूल ट्रंक इससे अलग होगा और यह स्पेसक्राफ्ट 1600 डिग्री के उच्च तापमान पर एक्सपोज हो जाएगा।
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इसके बाद कैप्सूल से पैराशूट दो स्टेज में निकलेगा। पहले स्टेज का पैराशूट धरती से करीब 5 से 7 किलोमीटर की ऊंचाई पर और दूसरे स्टेज का पैराशूट 2 किलोमीटर की ऊंचाई पर खुलेगा। इसके बाद सभी अंतरिक्ष यात्रियों की कैलिफोर्निया की तट पर सुरक्षित लैंडिंग हो सकेगी।

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