आज के समय में किसान केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रहना चाहते,यही कारण है कि कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फसलें किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन रही हैं. ऐसी ही एक फसल है मेथी की, जिसकी हरी पत्तियों (सब्जी) और दानों (मसाला/औषधि) दोनों की मार्केट में हमेशा भारी मांग रहती है. इस मेथी की खेती से किसान उम्मीद से कहीं ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं और मालामाल हो सकते हैं.तो आइए जानते हैं कैसे आप मेथी की खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं
मेथी की खेती को लाभकारी बनाने के लिए कुछ प्रमुख पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक होता है.
1. सही किस्म का चुनाव :
क्या करें:अच्छी पैदावार और मार्केट की मांग के अनुसार सही किस्म का चुनाव करें. कुछ प्रमुख किस्में हरी पत्तियों (भाजी) के लिए बेहतर होती हैं, जबकि कुछ दानों के लिए.
हरी पत्तियों के लिए: पूसा कसूरी, पूसा अर्ली बंचिंग (यह कम समय में तैयार होती है और कई कटाई देती है).
दानों के लिए:आर.एम.टी 305, राजेंद्र क्रांति, ए.एफ. जी 2, हिसार सोनाली. कुछ किस्में (जैसे राजेंद्र क्रांति, आर.एम.टी 305) रोग प्रतिरोधी भी होती हैं.
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी - हम आपके हैं कौन बनते
2. खेत और मिट्टी की तैयारी
दाने वाली मेथी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेस्ट होती है और जिसका pH मान 6.0 से 7.0 के बीच हो. फसल को उगाने से पहले हमेशा खेत की अच्छी तरह से जुताई करके भुरभुरा और खरपतवार मुक्त बनाएं.
खाद प्रबंधन:बुवाई से करीब 3-4 हफ्ते पहले प्रति हेक्टेयर 10-15 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाएं. रासायनिक उर्वरकों में, बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर 25-35 किलोग्राम नाइट्रोजन, 20-25 किलोग्राम फास्फोरस और 20 किलोग्राम पोटाश की पूरी मात्रा दें.
3. बुवाई का सही समय और तरीका
बीज दर:खेती के लिए दानों के लिए प्रति हेक्टेयर 20-25 किलोग्राम बीज कम से कम चाहिए होंगे.
कैसे बोएं:मेथी के बीज को 1-2 सेमी गहराई में बोना चाहिए. पंक्तियों में बुवाई (20-25 सेमी पंक्तियों के बीच और 10-15 सेमी पौधों के बीच) करना छिटकवां विधि से अच्छा मानते हैं, क्योंकि इससे निराई-गुड़ाई आसान होने से बीज की बचत होती है.
4. सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
मेथी को बहुत पानी नहीं चाहिए होता है. बुवाई के बाद एक हल्की सिंचाई करें और फिर पहली सिंचाई 4-6 पत्तियां आने पर करें. इसके बाद मिट्टी और मौसम के आधार पर 15-25 दिनों के अंतराल पर ही सिंचाई करना चाहिएय
खरपतवार नियंत्रण:फसल में खरपतवारों को नियंत्रित करना जरूरी होता है. तो हमेशा पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के 30-35 दिन बाद और दूसरी 60-65 दिन बाद करें.
5.कमाई का मॉडल
दानों के लिए:मेथी की पत्तियों की 2-3 कटाई के बाद फसल को दानों के लिए छोड़ देते हैं. जब फलियां सूख जाएं और दाने कठोर हो जाएं तब ही कटाई करें.
कितना हो सकता है मुनाफा?
उन्नत विधियों और सही किस्मों का यूज करने पर मेथी की खेती से प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपए से लेकर 75,000 रुपए या उससे भी अधिक की शुद्ध कमाई की जा सकती है.
मेथी की खेती: प्रति हेक्टेयर मुनाफे का कैलकुलेशन समझें
1. लागत का विवरण (प्रति हेक्टेयर)
| लागत का प्रकार | अनुमानित राशि |
|---|---|
| बीज | ₹2,500 |
| खाद और उर्वरक | ₹4,000 |
| सिंचाई | ₹3,000 |
| जुताई/बुवाई/निराई | ₹6,000 |
| कटाई और मजदूरी | ₹4,000 |
| अन्य खर्च (कीटनाशक, ट्रांसपोर्ट आदि) | ₹2,500 |
| कुल लागत | ₹22,000 |
2. उत्पादन (प्रति हेक्टेयर)
-मेथी की औसत उपज =12 से 15 क्विंटलप्रति हेक्टेयर
-हम यहां करीब 13 क्विंटल (1300 किग्रा)मान लेते हैं.
3. बाजार मूल्य (मार्केट रेट):
-सूखी मेथी दाना का थोक भाव = करीब ₹80–₹120 प्रति किलो (मौसम के अनुसार)
-हम यहाँ करीब ₹100 प्रति किलोमानते हैं
कुल आय = 1300 किलो × ₹100 =करीब₹1,30,000
4. शुद्ध मुनाफा: ₹1,30,000 (कुल आय) – ₹22,000 (कुल लागत) = ₹1,08,000 के आसपास
यानी के केवल 1 हेक्टेयर में मेथी उगाकर एक सीजन में करीब ₹1 लाख से ज्यादा का मुनाफा कमाया जा सकता है, और अगर किसान साल में दो बार फसल ले, तो यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है. इसी वजह से मेथी की खेती को "कम लागत, ज्यादा मुनाफा" वाली फसल माना जाता है. (नोट-खबर केवल जानकारी के लिए है, खेती कैसे करना और करना है कि नहीं ये किसान के ऊपर है)
FAQ
Q1. मेथी की खेती क्यों फायदे का सौदा है?
A1.मेथी की हरी पत्तियों और दानों की पूरे साल भारी मांग रहती है. कम लागत और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को अच्छा मुनाफा देती है.
Q2. मेथी की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
A2. मेथी की फसल 30 से 40 दिनों में पत्तियों के लिए और 90 से 100 दिनों में बीज (दाने) के लिए तैयार हो जाती है.
Q3. मेथी की खेती से प्रति हेक्टेयर कितना मुनाफा हो सकता है?
A3. सही देखभाल और अच्छी किस्म के बीजों के साथ किसान प्रति हेक्टेयर ₹1.5 से ₹2 लाख तक का मुनाफा कमा सकते हैं.
Q4. किन राज्यों में मेथी की खेती सबसे अधिक होती है?
A4. राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात में मेथी की खेती बड़े पैमाने पर होती है.
Q5. मेथी की खेती के लिए कौन सा मौसम सबसे उपयुक्त है?
A5.मेथी की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है, जब मौसम ठंडा और शुष्क होता है। यह फसल ठंडी जलवायु में बेहतर उत्पादन देती है.

Comments