छुरिया : गाय, बैल, बकरी जैसे पशओं को पालना मनुष्य के लिये अच्छा काम हो सकता है लेकिन इन्हीं पशुओं को रात के समय गांव में खुला छोड़कर खुद चैन की नींद सो जाना ये कैसा पशु प्रेम है। पशुओं के लिये तो दुख की बात है ही नगर में रहने वाले, आने जाने वाले राहगीरों, बस, ट्रक, मोटर और कुल मिलाकर सभी को परेशानी पैदा कर रहे है ये खुले में घूम रहे पशु। दिन और रात को अपने पालतू पशुओं को खुला छोड़ देने से पशु पालकों की समस्या तो हल हो जाती है लेकिन ये पशु दिन या रात को सड़क के बीचोबीच आराम से बैठ जाते हैं जिससे आवागमन में बड़ी परेशानी होती है। सुबह से लेकर रात तक राहगीरों छोटे एवं भारी वाहन, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों, राहगीरों सभी को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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दुर्घटना की संभावना दुगनी हो जाती है। कुछ दिनों पहले ही नगर में नगर पंचायत के पास नगर के एक युवक के साथ इसी तरह से दुर्घटना घटी जिसमें युवक को बहुत गंभीर चोट आई बड़ी मुश्किल से हालत सुधरी है। पशु पालकों के द्वारा एक ओर पशुओं को खुला छोड़ देना और यदि किसी की कोई दुर्घटना हो जाती है तब यही पशु पालक अपने पशुओं की होने वाले क्षति के लिये दावा आपित्त करने लगते हैं और मुआवजा मांगने से पीछे नहीं रहते हैं।
नगर पंचायत छुरिया द्वारा नगर में कई बार मुनादी भी कराई गई है कि पशु पालक अपने पशुओं को रात में खुला न छोड़े घर में बांध कर रखें अन्यथा उन पर दण्ड़ात्मक कार्यवाही की जावेगी लेकिन इसके बाद भी पशु पालकों द्वारा अपने पशुओं को रात में खुला छोड़ने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसके लिये पुलिस विभाग, नगर पंचायत एवं पशु पालकों की एक बैठक करवाई जाये और पशु पालकों को सख्त हिदायत दी जाये की वे अपने पालतू पशुओं को रात को खुला न छोड़े अन्यथा उन पर प्रशासनिक और सामाजिक रूप से कार्यवाही की जावेगी तब कहीं जा कर इस समस्या का हल निकल पायेगा।
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नगर पंचायत छुरिया को रात में खुले में घूमते या बैठे हुये आवारा पशुओं को पकड़ कर कांजी हाउस या गौशाला में भेज दिया जाना चाहिये और जो भी पशु पालक अपने पशुओं के बारे में पूछताछ करने आये उस जुर्माना लगाने जैसी कार्यवाही कठोरता से करनी चाहिये।

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