आज के समय में किसान पारंपरिक खेती से हटकर नकदी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका कारण है – कम लागत में ज्यादा मुनाफा और बाजार में लगातार बनी हुई मांग। इन्हीं नकदी फसलों में नाशपाती की खेती किसानों के लिए एक सुनहरा विकल्प बन चुकी है।
नाशपाती का पौधा सिर्फ ₹5 से ₹10 में मिल जाता है और एक बार लगाने के बाद सालों तक फल देता है। यही वजह है कि किसान इसे “पैसों की मशीन” तक कहने लगे हैं। सही देखभाल और योजना से एक एकड़ में लगाए गए पौधों से लाखों रुपये की आमदनी संभव है।
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी - हम आपके हैं कौन बनते
नाशपाती की खेती क्यों है फायदेमंद?
नाशपाती की खेती में मुनाफे के कई कारण हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह फसल एक बार लगाने के बाद लंबे समय तक उत्पादन देती है। पौधा लगाने के 3 से 4 साल बाद अच्छे से फल देना शुरू कर देता है और सालाना 15 से 20 साल तक लगातार उपज देता रहता है।
इसके अलावा, इसका बाजार भाव भी किसानों के लिए बोनस की तरह है। मौसमी फलों में जहां कीमतें अक्सर गिरती-बढ़ती रहती हैं, वहीं नाशपाती की कीमत सामान्यत: ₹60 से ₹100 प्रति किलो के बीच बनी रहती है। खासकर गर्मियों और बरसात के मौसम में इसकी मांग और भी बढ़ जाती है, जिससे किसान को अच्छी कीमत मिलती है।
कम लागत, ज्यादा मुनाफा – एक उदाहरण
मान लीजिए एक पेड़ से औसतन 100 किलो फल मिलता है और बाजार में कीमत ₹80 प्रति किलो है, तो एक पेड़ से सालाना ₹8,000 की कमाई हो सकती है। अगर एक एकड़ में लगभग 400 पेड़ लगाए जाएं, तो सालाना कमाई लगभग ₹32 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
हालांकि यह अनुमान आदर्श परिस्थितियों के आधार पर है। असल कमाई मौसम, पौधों की सेहत, कीटों और बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है।
खाली जमीन का सही उपयोग – इंटरक्रॉपिंग
नाशपाती के पौधों को फल देने में समय लगता है। पहले 3–4 साल तक किसान पौधों के बीच की खाली जगह में उड़द, मूंग, आलू, हल्दी, गेहूं जैसी फसलें उगा सकते हैं। इससे न सिर्फ अतिरिक्त कमाई होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।
नाशपाती की खेती के लिए जरूरी बातें
मिट्टी और जलवायु
नाशपाती की खेती के लिए बलुई दोमट और गहरी, पानी निकासी वाली मिट्टी सबसे अच्छी होती है। मिट्टी का pH स्तर 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। जलवायु की बात करें तो यह पौधा ठंड और गर्मी दोनों को सहन कर सकता है, लेकिन बेहतर उत्पादन के लिए ठंडे मौसम की आवश्यकता होती है। भारत में इसकी खेती जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अधिक होती है।
रोपण का समय और दूरी
पौधारोपण का सही समय जून से दिसंबर तक माना जाता है। पौधों के बीच आमतौर पर 10×10 फीट की दूरी रखी जाती है, ताकि उन्हें बढ़ने और फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिले।
सिंचाई और खाद
देखभाल और छंटाई
फलों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समय-समय पर पौधों की छंटाई जरूरी है। इसके अलावा, रोग और कीट नियंत्रण के लिए नियमित निरीक्षण और आवश्यकता पड़ने पर दवाओं का छिड़काव करें।
कटाई और पैदावार
नाशपाती के फलों की कटाई किस्म के अनुसार जून से सितंबर के बीच होती है। फल पकने पर हल्के पीले रंग के हो जाते हैं और हाथ लगाने पर नरम महसूस होते हैं। सही समय पर कटाई करने से फल की गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ दोनों बेहतर रहती हैं।
मुनाफे का संक्षिप्त कैलकुलेशन
यह अनुमान आदर्श परिस्थितियों पर आधारित है। वास्तविक कमाई मौसम, पौधों की सेहत और बाजार कीमतों पर निर्भर करती है।
नाशपाती की खेती उन किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो कम लागत में लंबी अवधि तक मुनाफा चाहते हैं। सही किस्म, मिट्टी, जलवायु और देखभाल के साथ यह फसल किसानों को हर साल लाखों रुपये की कमाई दे सकती है।

Comments