खबर का असर : स्वास्थ्य विभाग का कड़ा रुख,9M India Limited की इन दवाओं पर रोक

खबर का असर : स्वास्थ्य विभाग का कड़ा रुख,9M India Limited की इन दवाओं पर रोक

रायपुर :  छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई करने वाली 9M इंडिया लिमिटेड कंपनी पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए 2024 में निर्मित सभी पैरासिटामोल दवाओं के बैचों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. गुणवत्ताहीन पाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) ने सभी वितरित दवाओं को वापस मंगाने के निर्देश जारी किया है. यह कार्रवाई स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के सख्त निर्देशों के बाद शुरू की गई है.

chhattisgarh.co की रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग जागा है. रिपोर्ट में 9 M इंडिया लिमिटेड और उनके अधीनस्थ कंपनी द्वारा सप्लाई की गई पैरासिटामोल 500 एमजी और 650 एमजी टैबलेट्स की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे, जिसमें काले धब्बे और अन्य खामियां पाई गईं. सीजीएमएससी ने 21 अगस्त 2025 को एक आधिकारिक पत्र जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 2024 में निर्मित सभी बैचों का उपयोग और वितरण तुरंत बंद किया जाए. साथ ही उपलब्ध स्टॉक को रायपुर स्थित मुख्य दवा गोदाम में वापस जमा किया जाए.

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पैरासिटामोल 650 एमजी टैबलेट ड्रग कोड-SP19448 बैच नंबर RT24045 मैन्युफैक्चरिंग डेट 01-02-2024, एक्सपायरी डेट 31-01-2026

पैरासिटामोल 500 एमजी टैबलेट आईपी ड्रग कोड D395 बैच नंबर RT23547 मैन्युफैक्चरिंग डेट 01-11-2023

कंपनी के अधीनस्थ संस्थाओं से सप्लाई की गई सभी 2024 बैचों की दवाओं को गुणवक्ताहीन घोषित किया गया है. इन टैबलेट्स पर काले धब्बे और अन्य भौतिक खामियां हैं, जो मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

किसे जारी किया गया पत्र ?

सीजीएमएससी ने इस पत्र को प्रदेश भर के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और अधिकारियों को भेजा गया है.

  1. अधीक्षक, डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर स्मृति अस्पताल, रायपुर
  2. अधीक्षक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर मेमोरियल अस्पताल, रायपुर
  3. अधीक्षक, डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, रायपुर.
  4. शासकीय डेंटल कॉलेज, रायपुर.
  5. समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO)
  6. समस्त सिविल सर्जन.
  7. समस्त खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO). समस्त चिकित्सा प्रभारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)
  8. शहरी स्वास्थ्य एवं वेलनेस सेंटर (UHC) के प्रभारी

इन सभी को निर्देश दिए गए हैं कि उपलब्ध स्टॉक को तुरंत वापस भेजा जाए और मरीजों को वैकल्पिक दवाओं की व्यवस्था की जाए.

बड़ा सवाल : दो बैच फेल होने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अनुसार, अगर दो या अधिक बैच अमानक पाए जाते हैं, तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान ड्रग्स एंड कॉसमेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत मौजूद है. हालांकि, अभी तक सीजीएमएससी ने केवल नोटिस जारी किया है और सभी 2024 बैचों को वापस मंगाने का आदेश दिया है. देखना होगा कि सभी दवाओं को वापस लाने के बाद कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है.

खराब दवाओं के सेवन से मरीजों पर क्या असर?

यह सबसे चिंताजनक मुद्दा है. जून 2025 से अब तक हजारों मरीजों को ये दवाएं वितरित हो चुकी हैं. नकली दवाओं के सेवन से और गंभीर साइड इफेक्ट्स जैसे लीवर डैमेज, एलर्जी रिएक्शन होते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि पैरासिटामोल जैसी दवा अगर गुणवक्ताहीन हो, तो यह हत्या के समान है.

मरीजों को मुआवजा और गहन जांच की मांग तेज हो गई है. स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक कोई आधिकारिक जांच शुरू नहीं की है, लेकिन लल्लूराम डॉट कॉम की रिपोर्ट के बाद दबाव बढ़ रहा है. क्या खराब और नकली दवाओं के दुष्परिणामों की स्वतंत्र जांच होगी, क्या प्रभावित मरीजों की पहचान और उनका इलाज सुनिश्चित किया जाएगा? ये सवाल अब स्वास्थ्य विभाग के सामने हैं. अगर समय रहते जांच न हुई, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है.

स्वास्थ्य विभाग का बयान

सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के ने कहा कि हम लगातार दवाओं की गुणवत्ता पर नजर रखे हुए हैं. अमानक दवाओं पर सख्त कार्रवाई की जा रही है और मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है. स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने भी आश्वासन दिया कि दोषी कंपनियों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे. कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है.  

सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रितेश कुमार अग्रवाल ने कहा दो तरीके से जांच होती है. पहला गुणवत्ता को लेकर रासायनिक, रासायनिक जांच के लिए सैंपल भेजा गया है, रिपोर्ट का इंतजार है. दूसरा भौतिक, जिस तरह से काले धब्बे, पैकिंग में टूटना, चुरा हो जाने के कारण रोक लगायी गई है. दवा वापस मंगाई गई है, रिप्लेस करने को कहा गया है. 








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