दुर्ग : खैरागढ़ की तत्कालीन नायब तहसीलदार और वर्तमान में कबीरधाम जिले में पदस्थ तहसीलदार रश्मि दुबे को गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। दुर्ग संभाग आयुक्त सत्यनारायण राठौर ने यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 के प्रावधानों के विपरीत आदेश पारित करने के मामले में की है।
आदेश विधि विपरीत पाया गया
मामले में मिली जानकारी के अनुसार, तहसीलदार रश्मि दुबे ने अपने कार्यकाल के दौरान हितबद्ध पक्षकार को सुनवाई का अवसर दिए बिना ही आदेश पारित कर दिया था। यह आदेश भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुरूप नहीं था। इसके बाद प्रकरण द्वितीय अपील के रूप में संभाग आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां विस्तृत जांच के बाद आदेश को विधि विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया गया।
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निलंबन की कार्रवाई
संभाग आयुक्त ने पाया कि रश्मि दुबे द्वारा पारित आदेश कर्त्तव्य निर्वहन में गंभीर अनियमितता और लापरवाही का प्रतीक है। इस आधार पर उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 09 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय कबीरधाम निर्धारित किया गया है। साथ ही, उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।
मामला कैसे सामने आया?
पक्षकार मनोज कुमार पिता स्व. छदामी लाल एवं अन्य ने इस मामले को चुनौती देते हुए आयुक्त न्यायालय दुर्ग संभाग में द्वितीय अपील दायर की थी। यह अपील प्रकरण क्रमांक 325 अ-6 (अ) वर्ष 2022-23 (ई-कोर्ट क्र. 202302980100004) था। इसमें बताया गया कि अधीनस्थ न्यायालय, अर्थात् नायब तहसीलदार खैरागढ़ द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक 202108092600041 31-6/ (अ) वर्ष 2020-21 में दिनांक 21 अक्टूबर 2021 को पारित आदेश विधि के विपरीत था। बाद में इसे अनुविभागीय अधिकारी (रा.) खैरागढ़ और अंततः संभाग आयुक्त ने भी निरस्त कर दिया।
प्रशासनिक सख्ती का संदेश
इस कार्रवाई को प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ी सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों को यह साफ संदेश दिया गया है कि कर्त्तव्य पालन में लापरवाही या विधि विपरीत कार्यवाही को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेष रूप से ऐसे मामलों में जहां जनता के हित प्रभावित होते हैं, शासन द्वारा कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। निलंबन अवधि के दौरान रश्मि दुबे को विभागीय जांच का सामना करना होगा। जांच में दोष सिद्ध होने पर उनके खिलाफ और भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, इस मामले ने प्रदेश के अन्य राजस्व अधिकारियों के बीच भी हलचल मचा दी है।
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