शुक्र प्रदोष व्रत पर बन रहें हैं कई खास योग, पढ़ें आज का पंचांग

शुक्र प्रदोष व्रत पर बन रहें हैं कई खास योग, पढ़ें आज का पंचांग

शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक विशेष व्रत है। यह व्रत प्रेम, वैवाहिक सुख, पारिवारिक सौहार्द और मानसिक शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से विवाहित दंपतियों और वैवाहिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह व्रत लाभकारी होता है। ऐसे में चलिए पढ़ते हैं आज का पंचांग।

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आज का  पंचांग (Panchang 5 September 2025)

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त - ब्रह्म मुहूर्त 3 बजकर 12 मिनट पर

शोभन योग - दोपहर 1 बजकर 53 मिनट तक

करण -

कौलव - दोपहर 3 बजकर 45 मिनट तक

तैतिल - ब्रह्म मुहूर्त 3 बजकर 12 मिनट तक

वार - शुक्रवार

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय - सुबह 6 बजकर 1 मिनट से

सूर्यास्त - शाम 5 बजकर 16 मिनट पर

चंद्रोदय - प्रातः 5 बजकर 16 मिनट से

चंद्रास्त - ब्रह्म मुहूर्त 4 बजकर 15 मिनट पर (6 सितंबर)

सूर्य राशि - सिंह

चंद्र राशि - मकर

शुभ समय

अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक

अमृत काल - दोपहर 1 बजकर 16 मिनट से दोपहर 2 बजकर 52 मिनट तक

अशुभ समय

राहुकाल - सुबह 10 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक

गुलिकाल - सुबह 7 बजकर 36 मिनट से सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक

यमगण्ड - दोपहर 3 बजकर 29 मिनट से दोपहर शाम 5 बजकर 3 मिनट तक

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव श्रवण नक्षत्र में रहेंगे…

श्रवण नक्षत्र: रात 11 बजकर 38 बजे तक

सामान्य विशेषताएं:  सीखने की क्षमता, बुद्धिमान, सहयोगी, ज्ञानार्जन, सुनने में निपुण, आत्मविश्वास की कमी, जिज्ञासु, अत्यधिक सतर्क और जिज्ञासु

नक्षत्र स्वामी: चंद्रमा

राशि स्वामी: शनि

देवता: विष्णु (रक्षक)

प्रतीक: कान

आज का व्रत और त्योहार - शुक्र प्रदोष व्रत

शुक्र प्रदोष व्रत हर महीने की श्रवण और भाद्रपद मास की शुक्रवार को प्रदोष काल में मनाया जाता है। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को भगवान शिव का पूजन एवं पार्वती माता की आराधना करते हैं। व्रत का पालन श्रद्धा और भक्ति से करने पर जीवन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

त्रयोदशी अवधि-

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 5 सितंबर प्रातः 4 बजकर 8 मिनट से

त्रयोदशी तिथि समाप्ति: 6 सितंबर ब्रह्म मुहूर्त 312 मिनट तक

शुक्र प्रदोष व्रत विधि-

स्नान और शुद्धि: शुक्रवार के दिन सूर्यास्त से पहले स्वच्छ जल से स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।

पूजा स्थान तैयार करें: घर में साफ स्थान पर शिवलिंग स्थापित करें या भगवान शिव का चित्र रखें।

पूजा सामग्री: फल, दूध, जल, फूल, धूप, दीप, बेलपत्र और नैवेद्य तैयार रखें।

व्रत आरंभ: दिनभर उपवास रखें। यदि आवश्यक हो तो फलाहार या निर्जला व्रत कर सकते हैं।

पूजा विधि -

  1. शाम के प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध और दही अर्पित करें।
  2. बेलपत्र, फूल और धूप अर्पित करें।
  3. शिव मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
  4. भजन और कथा: व्रत के दौरान शिवजी की स्तुति करते हुए भजन-कीर्तन करें या प्रदोष कथा सुनें।
  5. दान और सेवा: गरीबों को भोजन या वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है।
  6. व्रत समापन: अगले दिन सुबह व्रत खोलते समय भगवान शिव को प्रसाद अर्पित करें और भोजन ग्रहण करें।







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