गरियाबंद जल संसाधन विभाग का बड़ा कारनामा : फिंगेश्वर शाखा में 5 लाख रुपये कागजों पर खर्च, जमीन पर काम नहीं किसानों ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, जांच की मांग

गरियाबंद जल संसाधन विभाग का बड़ा कारनामा : फिंगेश्वर शाखा में 5 लाख रुपये कागजों पर खर्च, जमीन पर काम नहीं किसानों ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, जांच की मांग

गरियाबंद- : जल संसाधन विभाग फिंगेश्वर शाखा एक बार फिर विवादों में है। ग्रामीणों और दस्तावेजों से सामने आई जानकारी ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में नहरों और माइनरों की मरम्मत का काम कागजों पर दिखाकर लगभग 5 लाख रुपये ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया, जबकि जमीन पर कोई काम नहीं हुआ।कागजों में दिखा काम, हकीकत में शून्य सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिले दस्तावेजों में दर्ज है कि अमानाला, साजापाली और अन्य गांवों में टूट-फूट और मरम्मत कार्य किए गए।आमानाला में 51 जगह टूट-फूट और 24 जगह गड्ढों की मरम्मत दर्ज।

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सजापाली में 33 जगह टूटना और 31 जगह बोरियों से बांधने का काम दर्शाया गया।विभागीय अभिलेखों में 4750 बोरियों में मिट्टी/रेत भराई, और आधा किलोमीटर दूरी से सामग्री लाने का विवरण दिया गया।दस्तावेज बताते हैं कि यह कार्य रायपुर की महामाया एंड्रक्सन और जांजगीर-चांपा की ध्रुव एंटरप्राइजेस नामक फर्मों से कराया गया। दोनों फर्मों को करीब 2.5-2.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

किसानों का आरोप – 15 साल से नहीं हुआ कोई काम

ग्राम अमेठी के किसान बाके लाल यादव और नारद यादव ने बताया कि गांव में सिंचाई व्यवस्था के लिए किसान हर साल चंदा इकट्ठा करते हैं। जिनके पास खेत हैं उनसे 150 रुपये और जिनके पास खेत नहीं हैं उनसे 100 रुपये वसूला जाता है। इस चंदे से गांव की नहरों की देखभाल खुद किसान करते हैं। ग्रामीण दिलीप दीवान, हरी नारायण नंदे और बालाराम साहू ने कहा कि खेतों की मेड़ पर बोरियों से बांधने और पानी रोकने का काम भी किसानों ने खुद किया है। नहरों की हालत जर्जर है, लेकिन विभाग सिर्फ कागजों में मरम्मत दिखाकर ठेकेदारों को भुगतान कर देता है।

विभागीय चुप्पी और जांच समिति

इस पूरे मामले पर तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (SDO) एस. के. बर्मन ने कहा कि दस्तावेज देखने के बाद ही वह कुछ कह पाएंगे। इससे पहले ग्राम रोबा के किसान यादराम साहू ने भी इसी तरह के भ्रष्टाचार की शिकायत पुलिस अधीक्षक से की थी। शिकायत के बाद जिला कलेक्टर ने जांच समिति गठित की, जिसमें अपर कलेक्टर सहित तीन अधिकारियों को शामिल किया गया है। जांच फिलहाल जारी है। किसानों का कहना है कि अब विभाग उन नहरों की सफाई और मरम्मत की बजाय फर्जी भुगतान कर भ्रष्टाचार कर रहा है।वर्तमान में जल संसाधन विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास है। ऐसे में किसानों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।जिला कलेक्टर बी एस उइके ने कहा की यह मामला आपके माध्यम से जानकारी में आया हैं। जांच करने के बाद कार्यवाही किया जायेगा। पहले वाले मामले पर जांच समिति गठित हो गई हैं जांच जारी हैं।







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