उत्तर प्रदेश में किस पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब बागवानी भी कर रहे हैं, बहुत से किसान जो पिंक ताइवान अमरूद की बागवानी करते हैं. अमरूद के पेड़ 10 से 12 महीने में फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं. और अमरूद के बाग लगाने के लिए फरवरी से अप्रैल तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है. जिन किसानों ने इसी दौरान अमरूद का बाग लगाया है उनके पौधे अभी छोटे हैं ऐसे में किसान दो लाइनों के बीच में पड़ी खाली जगह में इन दिनों फूलगोभी की फसल लगा सकते हैं. फूल गोभी की फसल जल्द तैयार हो जाती है और किसानों को अच्छा उत्पादन भी देती है.
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जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक का कहना है कि किसान अमरूद का बाग हाई डेंसिटी पर लगाते हैं. दो लाइनों के बीच 6 से 7 फीट तक की दूरी रहती है. इस खाली पड़ी जगह को किसान बेहतर तरीके से उपयोग कर अतिरिक्त नहीं ले सकते हैं. सितंबर का महीना चल रहा है और यह समय फूलगोभी की रोपाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. किसान अमरूद के बाग में फूलगोभी लगाकर अच्छा उत्पादन ले सकते हैं. फूलगोभी की रोपाई के लिए किसान उन्नत किस्मों का चयन करें.
इस तरह से करें खेत की तैयारी
अमरूद के बाग में पर्याप्त नमी रहते ही बाग की जुताई कर दें. पॉवर वीडर से जुताई करें, अगर किसानों के पास छोटा ट्रैक्टर उपलब्ध हो तो उससे भी जुताई कर सकते हैं. मिट्टी को भुरभुरा बना लें, अंतिम जुताई करते समय गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी कंपोस्ट को मिट्टी में मिला दें. ऐसा करने से मृदा स्वास्थ्य में सुधार होगा, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में इजाफा होगा. खेत को तैयार करने के बाद बेड बना कर फूलगोभी की रोपाई कर सकते हैं, ध्यान रखें पौध ज्यादा पुरानी न हो.
इन बातों का भी रखें ध्यान
फूलगोभी की रोपाई करते समय पौधे से पौधे और लाइन से लाइन की दूरी का ध्यान रखें. पौधे से पौधा 45 सेंटीमीटर और लाइन से लाइन की दूरी 60 सेंटीमीटर रखें. ध्यान रखें पौध 25 दिन से ज्यादा की न हो. रोपाई के बाद सीधे सिंचाई न करें, अगर संभव हो तो मिनी स्प्रिंकलर से सिंचाई करें, ऐसा करने से पौधों की ग्रोथ तेजी के साथ होगी, और पानी की भी बचत होगी. पैदा होने वाली उपज की गुणवत्ता बेहतर होगी, फसल में रोग कम आयेंगे.
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