फूलगोभी भारत की सबसे लोकप्रिय सब्जियों में से एक है. सर्दियों में इसका स्वाद हर थाली की शान बढ़ा देता है. पराठा, सब्जी, अचार और पकौड़ी हर रूप में फूलगोभी पसंद की जाती है. यही कारण है कि इसकी खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित होती है. लेकिन अच्छी पैदावार के लिए खेती का सही तरीका अपनाना जरूरी है.
फूलगोभी ठंडी जलवायु की फसल है. इसके लिए 15 से 25 डिग्री तापमान सबसे अनुकूल माना जाता है. मिट्टी दोमट और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर होनी चाहिए. साथ ही मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए.
अच्छी किस्म के बीजों का चुनाव करना बेहद जरूरी है. बीजों को बोने से पहले फफूंदनाशक से उपचारित करना चाहिए. ताकि पौधे रोगों से सुरक्षित रहें. बीजों को नर्सरी में बोकर 25 से 30 दिन बाद खेत में रोपा जाता है.
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खेत की मिट्टी को अच्छी तरह जोतकर भुरभुरी बना लें. इसके बाद गोबर की खाद या कम्पोस्ट अच्छी मात्रा में डालें. खेत में उचित नाली-नालियां बना लें ताकि पानी का निकास आसानी से हो सके.
गोबर की खाद के साथ-साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करना चाहिए. नाइट्रोजन की मात्रा दो किस्तों में डालना फायदेमंद रहता है.
फूलगोभी की फसल पर तना छेदक, माहू और झुलसा जैसे रोग अक्सर हमला करते हैं. इसके लिए समय-समय पर दवाओं का छिड़काव करना चाहिए. जैविक उपायों में नीम का घोल या गोमूत्र का छिड़काव भी कारगर होता है.
रोपाई के करीब 90 से 120 दिन बाद फूलगोभी की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. जब फूल सफेद और कसे हुए दिखें, तभी इन्हें तोड़ना चाहिए. देर करने पर फूल पीले पड़ जाते है और बाज़ार भाव भी घट जाता है.
अगर किसान सही जलवायु, अच्छी किस्म, संतुलित खाद और उचित देखभाल पर ध्यान दें तो फूलगोभी की फसल से बेहतरीन पैदावार मिल सकती है. यह फसल न सिर्फ घरेलू जरूरत पूरी करती है बल्कि किसानों को बाजार में अच्छी आमदनी भी देती है.
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