धान की खेती में अच्छी पैदावार पाने के लिए समय पर खाद देना सबसे अहम कदम है. अक्सर किसान शुरुआती दो बार खाद डालने पर ध्यान देते हैं, लेकिन आखिरी खाद की टॉप ड्रेसिंग का समय और तरीका फसल की बढ़त और दानों की गुणवत्ता पर सीधे असर डालता है. रायबरेली के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के सहायक विकास अधिकारी कृषि दिलीप कुमार सोनी ने बताया कि सही समय पर और सही मात्रा में आखिरी खाद डालना फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों बढ़ा देता है.
'ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी - मोर संग चलव रे ,मोर संग चलव गा
आखिरी खाद का सही समय और महत्व
धान की फसल में देर से डाली गई नाइट्रोजन खाद पौधों को हरा-भरा तो बना सकती है लेकिन दाने पूरी तरह विकसित नहीं होते. इससे पौधों में रोग लगने और गिरने की संभावना भी बढ़ जाती है. इसलिए दिलीप कुमार सोनी के मुताबिक आखिरी खाद बाली निकलने से ठीक पहले या पैनिकल इनिशिएशन (PI) स्टेज पर डालना चाहिए, जो आमतौर पर रोपाई के 45-55 दिन बाद होता है.
उर्वरक का सही तरीका और मात्रा
धान की टॉप ड्रेसिंग में मुख्य रूप से यूरिया (नाइट्रोजन) दी जाती है. प्रति एकड़ 25-30 किलो यूरिया पर्याप्त रहता है. अगर मिट्टी में जिंक या सल्फर की कमी हो तो जिंक सल्फेट 10-12 किलो और जिप्सम 40 किलो प्रति एकड़ डालना फायदेमंद होता है. खाद डालने से पहले खेत में नमी होना जरूरी है. हल्की सिंचाई के बाद खाद डालने से पोषक तत्व मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाते हैं और पौधों तक पहुंचते हैं.
ये भी पढ़े : तखतपुर थाना प्रभारी का बड़ा कारनामा,पीड़ित और आरोपी दोनों पक्ष से लिया रिश्वत, लाइन अटैच
धान की बाली के समय खास ध्यान
धान में आखिरी खाद डालते समय खेत में पानी की गहराई पर ध्यान दें. हल्की नमी हो लेकिन पानी ज्यादा न भरें, क्योंकि इससे यूरिया बह सकता है. खाद डालने के बाद हल्की सिंचाई करें ताकि पोषक तत्व जड़ों तक पहुंच सकें. इस समय खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी है क्योंकि वे खाद और पानी का बड़ा हिस्सा अपने लिए ले लेते हैं.
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments