रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया को पुनः शुरू करने का ऐलान किया है। विभाग के अनुसार, राज्य के विभिन्न वनमंडलों में 1484 रिक्त पदों के लिए अभ्यर्थियों का दक्षता परीक्षण अब डिजिटल टेक्नोलॉजी सिस्टम के जरिए कराया जाएगा।
क्यों दोबारा शुरू हो रही है भर्ती प्रक्रिया
वन विभाग ने बताया कि पहले चरण में 16 नवंबर 2024 से 20 दिसंबर 2024 के बीच वनरक्षक भर्ती के लिए शारीरिक मापजोख और दक्षता परीक्षण आयोजित किए गए थे। उस दौरान कुछ अभ्यर्थियों का परीक्षण मैनुअल और कृत्रिम प्रकाश में हुआ था, जिससे टेस्टिंग की पारदर्शिता और सटीकता पर सवाल उठे। अब विभाग ने इन अभ्यर्थियों का पुनः परीक्षण डिजिटल सिस्टम के माध्यम से कराने का निर्णय लिया है ताकि प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सटीक हो सके।
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28 अक्टूबर से शुरू होगी नई परीक्षा प्रक्रिया
विभाग के अनुसार, वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया 28 अक्टूबर 2025 से पुनः शुरू की जाएगी। सभी पात्र अभ्यर्थी अपने एडमिट कार्ड 6 अक्टूबर 2025 से विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.forest.cg.gov.in से डाउनलोड कर सकते हैं।
वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं हो तो...
विभाग ने बताया है कि यदि किसी अभ्यर्थी को तकनीकी कारणों से वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में कठिनाई होती है, तो वह आवेदित वनमंडल कार्यालय या भर्ती के लिए चयनित नोडल वनमंडल कार्यालय से संपर्क कर सकता है।
साथ ही, तकनीकी सहायता (Technical Support) के लिए विभाग ने एक WhatsApp नंबर भी जारी किया है- 7489986772
अभ्यर्थी अपनी समस्या का विवरण इसी नंबर पर संदेश के रूप में भेज सकते हैं।
विभाग की अपील अभ्यर्थियों से
विभाग ने सभी अभ्यर्थियों से आग्रह किया है कि —
भर्ती से जुड़ी मुख्य जानकारी (एक नजर में)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भर्ती पद | वनरक्षक (Forest Guard) |
| कुल पद | 1484 |
| विभाग | छत्तीसगढ़ राज्य वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग |
| परीक्षा मोड | डिजिटल टेक्नोलॉजी सिस्टम के माध्यम से |
| परीक्षा प्रारंभ | 28 अक्टूबर 2025 से |
| एडमिट कार्ड जारी | 6 अक्टूबर 2025 से |
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की तैयारी
विभाग का कहना है कि इस बार पूरी भर्ती प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे उम्मीदवारों की उपस्थिति, शारीरिक दक्षता परीक्षण, और स्कोरिंग प्रक्रिया स्वचालित और पारदर्शी तरीके से दर्ज होगी। इससे किसी भी प्रकार की त्रुटि या मानवीय हस्तक्षेप की संभावना कम हो जाएगी।
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