दिल्ली : राजेश शर्मा ने प्राचार्य पदोन्नति में लेक्चरर कैडर के 65 प्रतिशत में से एलबी संवर्ग के लिए 30 फीसदी कोटा निर्धारित करने के राज्य सरकार के प्रावधान को चुनौती दी थी।मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के सिंगल बेंच में हुई। जस्टिस नरसिम्हा के सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ई संवर्ग के 1378 व्याख्याताओं के प्राचार्य के पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ होने की उम्मीद जताई जा रही है।मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सिंगल बेंच में प्राचार्य पदोन्नति के मामले की सुनवाई हुई।
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एलबी संवर्ग की ओर से याचिकाकर्ता रामगोपाल साहू के अधिवक्ता आशुतोष गढ़े के साथ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने पैरवी की।अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष राज्य शासन के प्रावधानाओं के साथ ही पदोन्नति के लिए बनाए गए नियमों व शर्तों की जानकारी दी।अधिवक्ताओं ने याचिकाकर्ता राजेश शर्मा द्वारा याचिका में उठाए गए मुद्दों को निराधार व गलत, द्वेषवश और असंवैधानिक नियमों के विपरीत बताया। राज्य शासन की ओर से अधिवक्ता नटराजन ने पक्ष रखा। संवर्ग निर्धारण और पदोन्नति नियमों को सही ठहराया।
मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता राजेश शर्मा की याचिका को खारिज कर दिया है।सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ई संवर्ग के 1378 लेक्चरर्स जो प्रिंसिपल बनने की राह देख रहे हैं,उनको राहत मिलेगी।बिलासपुर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने पहले ही राज्य शासन के नियमों व मापदंडों को सही ठहराते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया है।हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले के बाद राज्य शासन ने टी संवर्ग के व्याख्याताओं को प्राचार्य के पद पर पदोन्नति दे दी है।ई संवर्ग के 1378 लेक्चरर्स का मामला अब भी हाई कोर्ट में लंबित है। मामले की सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा है।
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