धनिया का इस्तेमाल मसालों के तौर पर किया जाता है. इसके पाउडर से लेकर हरे धनिया की डिमांड साल भर बनी रहती है. वैसे तो धनिए की खेती साल भर हो सकती है लेकिन सबसे अनुकूल मौसम ठंड का है. ऐसे में आप ठंड के मौसम में धनिया लगाकर अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं.
धनिया का इस्तेमाल मसालों के तौर पर किया जाता है. इसके पाउडर से लेकर हरे धनिया की डिमांड साल भर बनी रहती है. वैसे तो धनिए की खेती साल भर हो सकती है लेकिन सबसे अनुकूल मौसम ठंड का है. ऐसे में आप ठंड के मौसम में धनिया लगाकर अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं. वहीं, हरा धनिया तो हाथों हाथ बिकता ही है साथ ही इसके बीज से पाउडर भी बनता है. ऐसे में आप को धनिया की खेती के बारे अच्छे से जान लेना चाहिए.
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किसान भाई धनिया की फसल साल में दो बार ले सकते हैं. इसमें आप रबी और खरीफ में धनिया ले सकते है. लेकिन धनिया के लिए रबी का सीजन ज्यादा अनुकूल है. इसमें खास तौर से बीजों के लिए धनिया की बुवाई होती है. हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों में नवंबर के अंतिम सप्ताह के आसपास ही इसकी बुवाई की जा सकती है, क्योंकि इसके बाद ठंड बढ़ने लगती है.
किसान भाई एक एक एकड़ में धनिया लगाना चाहते हैं, तो उन्हें 8 किलो बीज लगता है. और खेत की तैयार के लिए 3 हजार रुपए लगते हैं. बारिश के मौसम में धनिया की खेती के लिए, खेत को 2-3 बार रोटावेटर या कल्टीवेटर से जोतना चाहिए.
हाइब्रिड धनिया के बीजों का उपयोग करना बेहतर है, जैसे कि ईस्ट-वेस्ट, समृद्धि सीड्स, या गंगा सीड्स. अगस्त महीने में इन किस्मों के बीजों की बुवाई करने से अंकुरण जल्दी होता है.
पूरी खेती के लिए करीब 12 से 15 हजार रुपए की लागत आएगी. इसमें दो तरह की धनिया की खेती होती है. इसमें पत्ती वाले धनिया के लिए एक महीना और बीज के लिए करीब दो महीने का इंतजार करना पड़ेगा.
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अंकुरण आने के लगभग एक सप्ताह बाद धनिया में दोबारा सिंचाई करनी होती है. पौध हल्की बड़ी होने के बाद जब पौधों की छटाई करें, तो पौधे से पौधे की दूरी लगभग 15 सेंटीमीटर हो इसका ध्यान जरूर दें. अगर किसानों को पत्तों के लिये धनिये का उत्पादन करना है, तो सिंचाई 3 दिन के अंतराल में करनी होती है. ताकि पत्तियों का उत्पादन अधिक हो.
लगभग 1 से 2 महीने के बीच में धनिया को निराई-गुड़ाई का काम करना जरूरी होता है. जब पौधों में फूल खिलने लगते हैं, तब इसके बाद निराई-गुड़ाई की आवश्यकता नहीं रहती.
आमतौर पर, बुवाई से लेकर बीज तैयार होने तक तराई वाले क्षेत्रों में लगभग 3 महीनों में धनिया की फसल हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाती है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में यह समय बढ़कर 4 महीने का हो जाता है. हालांकि सलाद के रूप में इसके पत्तों को 2 महीने में लिया जा सकता है.
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