नई दिल्ली : पाकिस्तान में वकीलों ने संविधान के 26 वें और 27 वें संशोधनों को अस्वीकार कर दिया है। कहा है कि देश में संविधान सर्वोच्च है और न्यायपालिका स्वतंत्र है। वकीलों ने प्रस्ताव पारित कर नवगठित फेडरल कांस्टिट्यूशनल कोर्ट का बहिष्कार करने का संकल्प लिया।
वकीलों के सम्मेलन का आयोजन लाहौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और लाहौर बार एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया था। सम्मेलन में स्पष्ट तौर पर दोनों संविधान संशोधनों को अस्वीकार किया गया। वकीलों ने कहा, ये बदलाव संविधान को नुकसान पहुंचाने और न्यायपालिका को बर्बाद करने के उद्देश्य से किए गए। पूरा पाकिस्तान इन समय अंधेरे में खड़ा हुआ है।
इमरान खान की रिहाई की मांग
सम्मेलन में कांस्टिट्यूशनल कोर्ट को अनकांस्टिट्यूशनल बताया गया और इसे न्यायपालिका की हत्या से बनी अदालत करार दिया गया। सम्मेलन में लापता लोगों की अवैधानिक कैद से रिहाई की मांग की गई। साथ ही पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान समेत सभी राजनीतिक नेताओं की रिहाई की मांग की गई।
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कहा गया कि इन सभी की गिरफ्तारी फर्जी मामलों में की गई है। इन नेताओं को मानवाधिकारोंका उल्लंघन कर जेल में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के प्रमुख वाल्कर तुर्क ने 28 नवंबर को पाकिस्तान के इन दोनों संविधान संशोधनों पर गंभीर चिंता जताई थी।
उन्होंने कहा, इन संशोधनों से कानून का शासन कमजोर होगा जिससे मानवाधिकार हनन की घटनाएं बढ़ेंगी। विदित हो कि पाकिस्तानी संसद ने नवंबर में संविधान संशोधन कर सुप्रीम कोर्ट के अधिकारों में कटौती करते हुए फेडरल कांस्टिट्यूशनल कोर्ट के गठन का प्रस्ताव पारित किया था।
कैसे हुई आसिम मुनीर की नियुक्ति?
इस संशोधन के चलते सुप्रीम कोर्ट अब माल और फौजदारी के मुकदमों की ही सुनवाई कर सकेगा, इसके अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण मामले कांस्टिट्यूशनल कोर्ट सुनेगी। इन्हीं संशोधनों के चलते पाकिस्तान में तीनों सेनाओं के प्रमुख का पद सृजित हुआ जिस पर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की नियुक्ति हुई है।
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