गेहूं में डाले ये 3 जरुरी खाद,एक पौधे में होंगे 100 कल्ले,होगा रिकॉर्डतोड़ उत्पादन

गेहूं में डाले ये 3 जरुरी खाद,एक पौधे में होंगे 100 कल्ले,होगा रिकॉर्डतोड़ उत्पादन

गेहूं की फसल भारत के किसानों की मुख्य फसल है। यह उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। अच्छी पैदावार के लिए सही खाद का समय पर उपयोग बहुत जरूरी है।कई किसान गेहूं में कम उपज की समस्या से परेशान रहते हैं। इसका कारण पोषक तत्वों की कमी होता है। डीएपी, यूरिया और जिंक सल्फेट जैसी तीन मुख्य खादें पैदावार को दोगुना कर सकती हैं। इनसे बालियां लंबी और दाने मोटे बनते हैं।ये खादें पौधों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और जिंक प्रदान करती हैं। समय पर इन्हें डालने से कल्ले बढ़ते हैं। फसल मजबूत होती है और रोगों से बचाव होता है। सरकार भी इन्हें सब्सिडी पर उपलब्ध कराती है।

Apply these 3 essential fertilizers today, the length of the ears will be doubled.

खाद का नाम मात्रा प्रति एकड़ उपयोग का समय
डीएपी 50 किलोग्राम बुआई के समय
यूरिया 40-50 किलोग्राम पहली सिंचाई पर
जिंक सल्फेट 5 किलोग्राम पहली सिंचाई पर
यूरिया 25-30 किलोग्राम दूसरी सिंचाई पर
जिंक सल्फेट 5 किलोग्राम बुआई के समय वैकल्पिक
एनपीके 0:52:34 750 ग्राम स्प्रे दाना भरने के समय

डीएपी खाद का महत्व और उपयोग

डीएपी यानी डाई-अमोनियम फॉस्फेट में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फोरस होता है। यह गेहूं की बुआई के समय जड़ विकास के लिए सबसे अच्छी है। पौधे को शुरुआत से मजबूत पोषण मिलता है बुआई से पहले खेत की जुताई करें। फिर 50 किलोग्राम डीएपी को बीज के साथ मिलाकर डालें। इसे मिट्टी में अच्छे से मिला दें। इससे फॉस्फोरस जड़ों तक सीधे पहुंचता है। पैदावार में 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है अगर मिट्टी में फॉस्फोरस की कमी हो तो डीएपी जरूर डालें। बिना जांच के भी सामान्यतः यही मात्रा सही रहती है। ज्यादा डालने से नुकसान हो सकता है। हमेशा संतुलित मात्रा रखें।

यूरिया खाद का महत्व और उपयोग

यूरिया में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन पाया जाता है। यह पौधों की पत्तियों को हरा बनाती है। कल्ले निकलने और तने मजबूत करने में मदद करती है। पहली सिंचाई पर डालने से ग्रोथ तेज होती है।​​

पहली सिंचाई यानी बुआई के 20-25 दिन बाद 40-50 किलोग्राम यूरिया डालें। सिंचाई के तुरंत बाद भुरकाव करें। दूसरी सिंचाई पर 25-30 किलोग्राम और दें। इससे नाइट्रोजन की कमी नहीं होती शाम के समय डालें ताकि पौधे ज्यादा सोख सकें। ज्यादा यूरिया से पौधे जल सकते हैं। मिट्टी जांच के बाद ही मात्रा तय करें। इससे बालियां लंबी बनती हैं।​

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जिंक सल्फेट खाद का महत्व और उपयोग

जिंक सल्फेट गेहूं में क्लोरोफिल बढ़ाता है। पीलापन दूर करता है और दाने बेहतर बनते हैं। बालियों की लंबाई दोगुनी हो सकती है। 33 प्रतिशत जिंक वाला ही लें।​

पहली सिंचाई पर 5 किलोग्राम प्रति एकड़ डालें। इसे पानी में घोलकर स्प्रे करें। बुआई के समय भी थोड़ा मिला सकते हैं। जिंक की कमी से फसल कमजोर रहती है इससे मेटाबोलिक क्रिया तेज होती है। उपज में अच्छी बढ़ोतरी मिलती है। हर साल उपयोग करें खासकर रेतीली मिट्टी में।

सरकार की उर्वरक सब्सिडी योजनाएं

भारत सरकार पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना चला रही है। यह 2010 से लागू है। डीएपी, यूरिया और अन्य खादों पर सब्सिडी मिलती है। रबी 2025-26 के लिए 37,952 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं।​

यूरिया 45 किलोग्राम बैग सिर्फ 242 रुपये में मिलता है। सरकार बाकी लागत वहन करती है। डीबीटी से आधार पर सीधे दुकान से खरीदें। कोई किसान वंचित नहीं रहता नाइट्रोजन पर 43 रुपये प्रति किलो, फॉस्फोरस पर 48 रुपये की सब्सिडी है। जिंक जैसे माइक्रो न्यूट्रिएंट्स भी सस्ते मिलते हैं। मिट्टी परीक्षण योजना से हर दो साल में जांच मुफ्त होती है।​

खाद डालने का सही तरीका

सबसे पहले मिट्टी की जांच करवाएं। बुआई से पहले 8-10 टन गोबर खाद डालें। फिर डीएपी मिलाकर बुवाई करें पहली सिंचाई पर यूरिया और जिंक घोल बनाकर डालें। भुरकाव तुरंत करें। दूसरी सिंचाई पर यूरिया दें। कुल 5-6 सिंचाई करें दाना भरने पर एनपीके स्प्रे करें। खरपतवार हटाएं। साफ पानी दें। पीएच 6.5-7.5 रखें इन तीन खादों से गेहूं की पैदावार दोगुनी हो सकती है। समय पर उपयोग करें। सरकार सब्सिडी दे रही है। अच्छी उपज पाएं।










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