रामकथा के चतुर्थ दिवस मानस विदुषी देवी चंद्रकला ने गरियाबंद के गांधी मैदान में श्री राम जन्म की कथा का रसपान कराया

रामकथा के चतुर्थ दिवस मानस विदुषी देवी चंद्रकला ने गरियाबंद के गांधी मैदान में श्री राम जन्म की कथा का रसपान कराया

गरियाबंद :- सत्संग मानस मंडली द्वारा आयोजित राम कथा के चौथे दिन दीदी चंद्रकला ने कहा कि भगवान बांधने की चीज नहीं है , भगवान एक जगह केवल बंधते हैं उसका नाम है प्रेम..इसके अलावा संसार में कोई चीज ऐसी नहीं है जो परमात्मा को बांध सके , बैकुंठ में नहीं निवास मेरा ना योगी हृदय में आता हूँ मेरे भक्त जहां मेरा गान करें मैं वहीं स्वयं को पाया हूं भक्तों के खातिर सब करता मेरे भक्त मेरी दुर्बलता है यदि उन पर आँच कोई भी आए तो विधि विधान भी हिलता है मैं काल परे कल्पना परे मन बुद्धि में नहीं आता हूँ ब्रह्माण्ड अखिल में ना सिमटू पर भक्त हृदय में समाता हूं

हमारे सनातन धर्म में विश्वास की प्रधानता दी गई है , अंधविश्वास की नहीं
धर्म तो एक ही है सनातन धर्म , पंथ अनेक हो सकते हैं , आपको अगर अपने धर्म से प्रेम है तो एक बात याद रखिएगा , आप जिस पर भी आश्रित हैं चाहे वो संत हो चाहे वह गुरु हों मै हाथ जोड़कर बात एक कह रही हूं जीवन में जो व्यक्ति भगवान से मिलने का मार्ग बताए वही सच्चे गुरु होंगे और अगर कोई ये कहे राम नहीं , कृष्ण नहीं , देवी नहीं , शंकर जी नहीं बल्कि जो हैं बस हम हैं तो आज से कान पकड़ के उनसे दूर हो जाईए , वो न संत हो सकते हैं न सतगुरु हो सकते हैं क्योंकि सतगुरु भगवान से मिलने का रास्ता बताता है खुद भगवान नहीं बनता है। आपका कर्तव्य बनता है एसे गुरु का ही आदर् और सम्मान करें जो भगवान से मिलने का रास्ता बताए , उन्होंने कालनेमी हनुमान जी का उदाहरण भी बताया।

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सनातन धर्म से दूसरा इस संसार में कोई दूसरा धर्म नहीं
सदियों की मौन प्रतिक्षा में जब सपने पूरे होते हैं तब रोम रोम रो उठता है केवल दो नयन न रोते हैं, स्वाभिमान की रक्षा की जब कीमत बलिदान चुकाता है तब जाकर हम लोगों को ये शुभ दिन भगवान दिखाता है , हम है गवाह इन घड़ियों के हथकडियों से मजबूर नहीं पुष्पक विमान आकाश में हैं अब राम हमारे दूर नहीं, सत्कार आस्था का करिए युग बीत गए जो बनी रही। हिंदुस्तान के लिए बड़े गर्व का क्षण था जब कितने वर्षों के बाद ये वो पल आया जब अयोध्या धाम में हमारे राम लला अपने निज महल में विराजमान हुए ।







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