धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल,अमानक धान बताकर वसूली का आरोप

धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल,अमानक धान बताकर वसूली का आरोप

रामानुजगंज : बलरामपुर जिले के 49 धान खरीदी केंद्रों में 15 नवंबर से शुरू हुई खरीदी व्यवस्था एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। बीते एक माह के भीतर खरीदी प्रभारी को लेकर बार-बार बदलाव, कभी राजस्व तो कभी कृषि और कभी शिक्षा विभाग से नियुक्ति, अंततः समितियों के कर्मचारियों को प्रभारी बनाकर व्यवस्था को पटरी पर लाने का दावा किया गया, लेकिन अब कई केंद्रों से अवैध वसूली और अतिरिक्त धान लेने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

 वीडियो वायरल, किसानों का गंभीर आरोप

हाल ही में तातापानी धान खरीदी केंद्र से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक वृद्ध किसान सहित दर्जनों आदिवासी किसान खुले तौर पर आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं कि खरीदी प्रभारी द्वारा दो लोगों को विशेष रूप से तैनात किया गया है, जो धान को अमानक बताकर प्रति बोरी 500 से 1000 रुपये तक अवैध वसूली कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि प्रत्येक बोरी में आधा किलो से लेकर एक किलो तक अतिरिक्त धान जबरन लिया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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तातापानी के बाद अब बगरा धान खरीदी केंद्र से भी चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं। यहां किसानों का कहना है कि यदि कोई किसान 110 बोरी धान लेकर केंद्र पहुंचता है और तौल में भी 110 बोरी ही आती है, तो खरीदी पर्ची में केवल 105 बोरी दर्ज की जाती है। शेष पांच बोरी यह कहकर काट ली जाती हैं कि धान अमानक है और अतिरिक्त देना पड़ेगा। इस रवैये से किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और खुलकर नाराजगी जता रहे हैं।

सरकारी मंशा पर सवाल, बेलगाम खरीदी प्रभारी

एक ओर राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और धान का एक-एक दाना खरीदने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर कुछ खरीदी केंद्रों पर कथित रूप से चल रही अवैध वसूली सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। धान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसानों का शोषण न केवल व्यवस्था की कमजोरी उजागर करता है, बल्कि आने वाले समय में बड़े राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव की आशंका भी पैदा करता है।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल, कार्रवाई कब?

तातापानी, भावरमाल, महावीरगंज, बगरा सहित दर्जनों खरीदी केंद्रों से लगातार अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट बयान नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि किसानों की शिकायतों पर प्रशासन मौन क्यों है और दोषियों पर कार्रवाई कब होगी।

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खरीदी ड्यूटी सूची में संशोधन, चर्चाएं तेज

धान खरीदी केंद्रों पर ड्यूटी में लगाए गए अधिकारियों के नामों में अचानक किए गए संशोधन को लेकर भी जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है। आरोप हैं कि यह संशोधन पारदर्शिता के बजाय लेन-देन का परिणाम है। प्रथम सूची में शामिल अधिकारियों को हटाने के कारणों पर खाद्य विभाग द्वारा अब तक कोई आधिकारिक विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है। यदि पहले नियुक्त अधिकारी सक्षम थे तो उन्हें हटाया क्यों गया—यह सवाल अब पूरे जिले में गूंज रहा है।

अब निगाहें प्रशासन पर

किसानों का साफ कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है। फिलहाल जिले भर की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या अवैध वसूली और अनियमितताओं में लिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।







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