डायबिटीज की बीमारी में अगर शुगर लेवल कंट्रोल में न रहे तो ये काफी खतरनाक होता है. इसका असर हार्ट से लेकर किडनी तक में होता है. कुछ मरीजों में पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन जैसी समस्या भी होती है, लेकिन लोग इसको नजरअंदाज कर देते हैं. इस समस्या पर ध्यान न देना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. मेडिकल की भाषा में इसको डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं. डायबिटीज से होने वाली ये बीमारी क्या होती है, कितनी खतरनाक है और कैसे बचाव किया जा सकता है जिसमें नसें कमजोर हो जाती हैं. इसका असर हाथों और पैरों की नसों पर दिखता है. समय रहते इसका इलाज जरूरी है. बीते दिनों नोएडा सेक्टर 71 के कैलाश अस्पताल में भी ऐसा मामला आया था. यहां दक्षिण सूडान के पूर्व गवर्नर माननीय जुमा अली मालू नुरेन डायबिटीज (मधुमेह) और घुटनों में गंभीर दर्द के साथ हॉस्पिटल में आए थे. इन बीमारियों की वजह से पहले ही उनके पूरे स्वास्थ्य और रोज़मर्रा के कामकाज पर गंभीर असर पड़ रहा था. जांच में पता चला कि उनको डायबिटिक न्यूरोपैथी थी.
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चलने- फिरने तक में होने लगती है परेशानी:- डायबिटिक न्यूरोपैथी की वजह से इंसान के चलने फिरने की क्षमता बहुत कमजोर हो जाती है. सूडान से आए मरीज को भी यह समस्या थी. डायबिटिक न्यूरोपैथी की वजह से उनके पैरों की नसें कमजोर हो गई थी. हालांकि यहां उनका इलाज हुआ. दवाओं, पोषण संबधी देखभाल के बाद वह अब ठीक हो गए. डॉक्टरों के तालमेल और सही इलाज से मरीज की समस्या ठीक हो गई.
डायबिटीक न्यूरोपैथी से बचाव कैसे करें
शुगर लेवल कंट्रोल में रखें
दवाएं समय पर लें
खानपान का ध्यान रखें
पैरों में झनझनाहट को इग्नोर न करें

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