रायपुर : राज्य पुलिस सेवा के हालिया तबादला आदेश अब सवालों के घेरे में हैं। गृह विभाग की सूची में 35 एडिशनल एसपी और 60 डीएसपी के तबादलों के बावजूद कई जिलों में हैरान करने वाली गड़बड़ियां सामने आई हैं। कहीं एक ही पद पर तीन-तीन अफसर बैठा दिए गए हैं, तो कहीं संवेदनशील जिलों में महीनों से पद खाली पड़े हैं।
बिलासपुर जिले में हालात सबसे ज्यादा उलझे हुए हैं। एडिशनल एसपी ग्रामीण के एक ही पद पर अर्चना झा, अनुज कुमार और अब मधुलिका सिंह – तीन-तीन एडिशनल एसपी की पदस्थापना हो चुकी है। ट्रांसफर, निरस्तीकरण और चलताऊ व्यवस्था के चलते पूरा जिला प्रशासनिक भ्रम में दिख रहा है।
रायपुर डायल 112 में भी चौंकाने वाली स्थिति है। एक स्वीकृत पद के खिलाफ दो एडिशनल एसपी की पोस्टिंग कर दी गई है। अविनाश ठाकुर की एसीबी में प्रतिनियुक्ति के बाद उनकी जगह राज्य अन्वेषण एजेंसी से गोपीचंद मेश्राम और अमृता शोरी – दोनों को एक ही पद पर भेज दिया गया।
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राजनांदगांव में तो स्थिति और भी अजीब है। सीएसपी के एक ही पद पर पहले से आईपीएस वैशाली जैन मौजूद हैं, लेकिन 22 दिसंबर की लिस्ट में मंजूलता बाज और एलेक्जेंडर किरो – दोनों को उसी पद पर भेज दिया गया। नतीजा: एक ही कुर्सी, तीन अधिकारी।
सरगुजा (अंबिकापुर) में भी बिना पुराने एसडीओपी को हटाए नए एसडीओपी की पोस्टिंग कर दी गई, जिससे वहां दो-दो एसडीओपी हो गए हैं।
सबसे गंभीर मामला मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले का है, जहां पिछले सात महीनों से एडिशनल एसपी का पद खाली है। राजनीतिक और सीमावर्ती दृष्टि से संवेदनशील होने के बावजूद यहां नई नियुक्ति नहीं की गई। इसी तरह बिलासपुर ICWA में भी एडिशनल एसपी का पद खाली पड़ा है।
अफसरों की संख्या बढ़ने के कारण कई जिलों में चलताऊ सब-डिवीजन बना दिए गए हैं, लेकिन उन्हें अब तक शासन से नोटिफाई नहीं किया गया। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार इन सब-डिवीजनों की समीक्षा कर उन्हें आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दे, तो पोस्टिंग में पारदर्शिता आ सकती है और ऐसी गड़बड़ियों से बचा जा सकता है।
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