ED का बड़ा एक्शन : भारतमाला परियोजना भूमि घोटाले में 9 ठिकानों पर मारे छापे

ED का बड़ा एक्शन : भारतमाला परियोजना भूमि घोटाले में 9 ठिकानों पर मारे छापे

महासमुंद/रायपुर : छत्तीसगढ़ में सोमवार की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जबरदस्त दबिश के साथ हुई। भारतमाला परियोजना में हुए करीब 45 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले की जांच के सिलसिले में ईडी की टीमों ने रायपुर और महासमुंद में कुल नौ ठिकानों पर एक साथ छापामार कार्रवाई की।सीआरपीएफ के सुरक्षा घेरे में अधिकारियों ने घंटों तक दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच की।

तड़के सुबह सीआरपीएफ जवानों के साथ पहुंची टीमें

जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10 सदस्यीय ईडी की टीम लगभग 50 सीआरपीएफ जवानों के साथ चार वाहनों में सवार होकर निकली थी। यह कार्रवाई इतनी गुप्त रखी गई थी कि स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन को भी इसकी भनक तक नहीं थी। टीम ने सीधे चिह्नित ठिकानों पर दबिश दी और वहां मौजूद लोगों के मोबाइल फोन जब्त कर रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए।

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जसबीर बग्गा और ससुर हरमीत चावला के घर जांच

महासमुंद शहर में ईडी की कार्रवाई दो प्रमुख स्थानों पर केंद्रित रही। पहली टीम मेघ बसंत कॉलोनी निवासी जसबीर सिंह बग्गा के घर पहुंची, जो आर्यन होंडा एजेंसी के संचालक हैं। वहीं, दूसरी टीम ने वार्ड क्रमांक 13 में रहने वाले हरमीत सिंह चावला के निवास पर दबिश दी। जसबीर बग्गा, हरमीत सिंह खनूजा के भाई हैं, जबकि हरमीत चावला उनके ससुर हैं। इन स्थानों पर देर रात तक दस्तावेजों की सघन जांच जारी रही।

ला विस्टा कॉलोनी सहित करीबियों के दफ्तरों पर दबिश

ईडी ने महासमुंद के साथ ही राजधानी रायपुर में भी मोर्चा संभाला। रायपुर के अमलीडीह स्थित 'ला विस्टा' कॉलोनी में हरमीत सिंह खनूजा के मकान नंबर 118 पर कार्रवाई की गई। इसके अतिरिक्त, खनूजा के ससुर हरमीत चावला और उनके कुछ अन्य करीबियों के घर एवं दफ्तरों पर भी टीम ने दबिश दी। अधिकारियों ने इन ठिकानों से महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और जमीन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं।

भारतमाला परियोजना का मुआवजा खेल

यह पूरी छापामार कार्रवाई भारतमाला परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीनों के मुआवजे में हुई अनियमितताओं को लेकर की जा रही है। जांच के केंद्र में करीब 45 करोड़ रुपये का भूमि घोटाला है, जिसमें कुछ सरकारी अधिकारियों, जमीन मालिकों और जमीन दलालों की संलिप्तता होने की संभावना जताई जा रही है। ईडी इन ठिकानों से मिले रिकॉर्ड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घोटाले की राशि का लेन-देन किन माध्यमों से हुआ।










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