बिलासपुर : भारतमाला परियोजना के तहत हो रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर जिला प्रशासन ने स्थिति साफ कर दी है। ग्राम ढेका को छोड़कर परियोजना से प्रभावित शेष 9 गांवों में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी किसी भी प्रकार की शिकायत, दावा या आपत्ति अब तक सामने नहीं आई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रभावित व्यक्ति को आपत्ति दर्ज करानी है तो वह 15 दिनों के भीतर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बिलासपुर के कार्यालय में दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकता है।
प्रशासनिक जांच में ग्राम ढेका में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान अनियमितता पाए जाने के बाद तत्कालीन पटवारी और तहसीलदार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इसी कारण ढेका को अलग रखते हुए अन्य गांवों की स्थिति की अलग से समीक्षा की गई।
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जिला भू-अर्जन शाखा के अनुसार कर्रा, निमतरा, गतोरा, भिलाई, रलिया, कछार, हरदाडीह, नवागांव और मुड़पार गांवों में जांच के दौरान कोई अनियमितता नहीं पाई गई। इन गांवों में अधिक मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से खसरा विभाजन, फर्जी नामांतरण, बंटवारा या बाद की तारीख में किए गए निर्माण को मुआवजा सूची में शामिल करने जैसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है।
फर्जी नामांतरण, बंटवारे के आरोप भी खारिज
प्रशासन ने साफ किया कि आशय पत्र जारी होने की तिथि के बाद भूमि हस्तांतरण, व्यपवर्तन या बंटवारे के जरिए मुआवजा बढ़ाने की कोई कोशिश इन गांवों में नहीं पाई गई। भूमि पर स्थित संपत्तियों के विवरण को लेकर भी किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं की गई है।
15 दिन का मौका, उसके बाद मान्य नहीं
प्रशासन ने प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि किसी को मुआवजा, भूमि विवरण या अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर आपत्ति है, तो वह निर्धारित 15 दिवस की समय-सीमा में ही दावा प्रस्तुत करे, ताकि समय रहते उसका निराकरण किया जा सके।
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