दंतेवाड़ा :बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति,कला,लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य और आकर्षक रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो,थीम गीत का विमोचन किया।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा,वन मंत्री एवं जिला दंतेवाड़ा के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी, सहित बस्तर आईजी सुंदरराज पी., संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय, जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, वन मंडलाधिकारी जाधव सागर एवं अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी उपस्थित रहे।
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इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम, बस्तर की असली आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त मंच है।आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ हो रहा है।यहाँ बस्तर पंडुम-2026 का “लोगो” और “थीम गीत” का विमोचन किया है। बस्तर पंडुम सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक-परंपराओं, कला और विरासत का मंच है। छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के जरिए इन परम्पराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले साल हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी,तब समापन अवसर पर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस बार हम राष्ट्रपति महोदया को, माननीय केन्द्रीय गृहमंत्री और केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री समेत भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को आमंत्रित कर रहे हैं।पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर हमारे बस्तरवासियों का जोश, उत्साह खूब देखने को मिला।इस बार हम इसे और भव्य बना रहे हैं ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान बना पाए।इस बार बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धा में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर 12 की गई है। इसमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति तो होगी ही, इसके साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को शामिल किया गया है।इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाएँ। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं, शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा।
उन्होंने बस्तरवासियों और सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह है कि अपनी कला से बस्तर को गौरवान्वित करें, अधिक-से-अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित होने वाली प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लें। बस्तर पंडुम आपका उत्सव है, इसे मिलकर सफल बनाएँ, माँ दंतेश्वरी की कृपा से यह उत्सव सफल हो, बस्तर समृद्ध और शांत हो।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री, पर्यटन मंत्री ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजन तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकार के साथ संवाद किया।कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारपंरिक नेतृत्व कर्ता मांझी और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार का आभार जताया।

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