टमाटर ऐसा आइटम है, जिसके बिना सब्जी अधूरी है. किसी भी चीज में टमाटर डाल दीजिए तो उसका स्वाद ही दोगुना हो जाता है. ऐसे में बार-बार इसे बाजार से खरीदने की क्या जरूरत, अगर आप गमले और बेकार पड़े हुए प्लास्टिक के कंटेनर में ही एकदम लाल-लाल टमाटर उगा सकते हैं. बस दो-तीन स्टेप फॉलो कर लीजिए. इस बारे में डिटेल में बता रहे हैं रांची के जाने-माने गार्डनिंग एक्सपर्ट प्रभात कुमार.
गमले में उगाएं टमाटर
गमले में टमाटर उगाने के लिए सबसे पहले 12-15 इंच का गहरा गमला लें. गमले के नीचे जल निकासी के लिए छेद होना जरूरी है. इसमें डालने के लिए किसी उपजाऊ खेत की मिट्टी लें. इस मिट्टी को कुछ देर धूप में रखकर सूखने दें. इससे मिट्टी से छोटे-छोटे कीट खत्म हो जाते हैं. इसके बाद इस मिट्टी में गोबर की खाद, कोकोपीट, वर्मी कंपोस्ट और थोड़ी सी रेत मिलाएं, ताकि जल निकासी अच्छी हो. आम मिट्टी में नीम खली और बोन मील भी मिला सकते हैं.
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ऐसे बोएं बीज
टमाटर को हमेशा शाम के समय बोना चाहिए. बीज को 2-3 इंच गहराई में बोएं और हल्का पानी दें. अगर गमले में टमाटर के छोटे पौधे लगा रहे हैं तो पौधे को थोड़ी गहराई में और दूर-दूर लगाएं. कुछ तने को भी मिट्टी से ढक दें, इससे जड़ें मजबूत होती हैं.
प्लास्टिक की बोतल में उगाएं टमाटर
सबसे पहले एक प्लास्टिक की बोतल लें, फिर उसे हॉरिजॉन्टली काट लें. ऐसा करने पर बोतल का नीचे का हिस्सा गमले की तरह काम करेगा. बोतल में पानी निकलने के लिए छोटे-छोटे छेद कर दें. इसके बाद प्लास्टिक बोतल के निचले हिस्से में छोटे-छोटे पत्थर रख दें. ऐसा करने से पानी अच्छे से निकल पाएगा और पौधे की जड़ें सड़ने का खतरा कम होगा. प्लास्टिक बोतल से बनाए गमले में उपजाऊ मिट्टी भर दें.
इस तरह की खाद का करें इस्तेमाल
इसके बाद इस मिट्टी में गोबर की खाद, कोकोपीट और वर्मी कंपोस्ट डालें. बोतल को सिर्फ तीन-चौथाई तक ही मिट्टी और खाद से भरना है, ताकि पौधे की जड़ें अच्छे से फैल सकें. इसके बाद टमाटर के बीज या किसी छोटे से पौधे को मिट्टी में लगाएं. टमाटर के पौधे को लगाने के बाद ऐसे पानी दें, जिससे मिट्टी नम रहे, लेकिन बहुत ज्यादा गीली न हो.
फल और फूल दोनों आना होगा शुरू
अब टमाटर के पौधे वाली बोतल को किसी धूप वाली जगह पर रखें. आप खिड़की या बालकनी में रख सकते हैं. टमाटर का पौधा जैसे-जैसे बढ़ने लगे, उसे किसी रस्सी से बांध दें, ताकि टहनियों को सहारा मिल सके. कुछ दिनों के बाद टमाटर के पौधे में फूल और फल दोनों आने लगेंगे. आराम से इन्हें तोड़ें और रोज के खाने में इस्तेमाल करें.

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