सुकमा : माओवादी संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। माओवादी पार्टी की गुरिल्ला लिबरेशन आर्मी (GLA) के चीफ बाड़से देवा ने तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में अपने कई साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। यह आत्मसमर्पण तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष किया गया, जिसे सुरक्षाबलों की एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
बाड़से देवा माओवादी संगठन के सैन्य ढांचे में एक बेहद अहम पद पर कार्यरत था। वह माओवादी पार्टी की सशस्त्र इकाई GLA का प्रमुख था और लंबे समय से संगठन की सैन्य रणनीति, ऑपरेशन और हथियारों की सप्लाई से जुड़ा हुआ था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हिड़मा एनकाउंटर के बाद माओवादी संगठन की सैन्य टुकड़ियों की जिम्मेदारी काफी हद तक बाड़से देवा के हाथों में आ गई थी।
जानकारी के मुताबिक, हिड़मा और बाड़से देवा दोनों छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूर्वती गांव के निवासी थे। दोनों माओवादी संगठन के शीर्ष सैन्य नेतृत्व में शामिल माने जाते थे। बाड़से देवा की पहचान एक कुशल रणनीतिकार के रूप में थी, जिसकी भूमिका हथियारों की सप्लाई और गुरिल्ला ऑपरेशनों में बेहद अहम रही है।
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है
आत्मसमर्पण के दौरान बाड़से देवा ने सुरक्षाबलों को माउंटेन एलएमजी (लाइट मशीन गन) समेत अन्य हथियार भी सौंपे। उसके साथ माओवादी संगठन से जुड़े सैन्य ऑपरेशन के कई अन्य सदस्य भी आत्मसमर्पण में शामिल हुए, जिससे संगठन की आंतरिक संरचना को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लगातार चल रहे दबाव, सुरक्षा अभियानों और सरकार की आत्मसमर्पण नीति के कारण माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को कल मीडिया के सामने पेश किया जाएगा, जहां उनसे जुड़े कई अहम खुलासे सामने आ सकते हैं। यह घटनाक्रम माओवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के प्रयासों में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

Comments