भू-माफियाओं और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बिल्डरों के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख अख्तियार, बिल्डर और निगम अधिकारियों पर गिरेगी गाज…

भू-माफियाओं और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बिल्डरों के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख अख्तियार, बिल्डर और निगम अधिकारियों पर गिरेगी गाज…

राजनांदगांव  : छत्तीसगढ़ में भू-माफियाओं और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बिल्डरों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. राजनांदगांव के सत्यम परिवेश कॉलोनी (विस्तार आई.एन.सी.) में विकास अनुज्ञा के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है. टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग की जांच में हुए खुलासे के बाद अब इस कॉलोनी की भवन अनुज्ञा निरस्त करने और निर्माण कार्यों को सील करने की तैयारी पूरी कर ली गई है.

जांच में खुली पोल: नियमों को ताक पर रखकर दी अनुमति

शिकायतकर्ता गुरविंदर सिंह चड्डा की शिकायत पर जब संचालनालय स्तर की जांच समिति (अध्यक्षता- उप संचालक रोजी सिन्हा) ने मौके का मुआयना किया, तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए. विभाग ने पाया कि:

नियम विरुद्ध अनुमति: T&CP ने जमीन को ‘आवासीय’ उपयोग के लिए मंजूरी दी थी, लेकिन नगर निगम राजनांदगांव ने मिलीभगत कर वहां ‘वाणिज्यिक सह आवासीय’ (Commercial-cum-Residential) भवन अनुज्ञा जारी कर दी.

LIG प्लॉट में हेराफेरी: कॉलोनाइजर ने निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए आरक्षित भूखंडों के प्रावधानों में भी गंभीर लापरवाही बरती.

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अफसरों और बिल्डर पर होगी सख्त कार्रवाई

जांच समिति के प्रतिवेदन के आधार पर आयुक्त, नगर तथा ग्राम निवेश ने कड़ा रुख अपनाया है:

बिल्डर को नोटिस: मेसर्स विस्तार आई.एन.सी. के भागीदार विवेक मिरानी को नोटिस जारी कर 12 जनवरी 2025 को सुनवाई के लिए तलब किया गया है.

सील होंगे भवन: उल्लंघन कर बनाए गए वाणिज्यिक और निर्माणाधीन भवनों को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 की धारा 34(4) के तहत सील करने की अनुशंसा की गई है.

अफसरों पर गिरेगी गाज: गलत अनुमति जारी करने वाले नगर निगम के भवन अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1956 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए नगरीय प्रशासन विभाग को पत्र लिखा गया है.

बड़ा सवाल: निगम की भूमिका संदिग्ध

इस पूरे मामले में राजनांदगांव नगर पालिक निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. जब मुख्य विभाग (T&CP) ने केवल आवासीय अनुमति दी थी, तो निगम के अधिकारियों ने उसे वाणिज्यिक में कैसे बदल दिया? विभाग अब बिल्डर का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया पर भी विचार कर रहा है.










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