धान से बेहतर विकल्प बन रही गांठ गोभी,कम समय, ज्यादा फायदा

धान से बेहतर विकल्प बन रही गांठ गोभी,कम समय, ज्यादा फायदा

ठंड के मौसम में अधिकतर सब्जियों की खेती की जाती है. यही समय किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी अहम माना जाता है. ठंड के मौसम में उत्पादन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है. उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार किसानों को गांठ गोभी (नवल गोल) की खेती करनी चाहिए. उनके अनुसार यह फसल कम लागत और कम समय में बेहतर मुनाफा देने वाली है.

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार एक एकड़ में गांठ गोभी की खेती करने पर 200 से 300 क्विंटल तक उपज मिल सकती है. गांठ गोभी की खेती से किसान कम लागत, कम समय में ज्यादा मुनाफा कमा रहे है, यही वजह है कि आज गांठ गोभी धान से बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. यदि किसान इसे मंडी में न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलो थोक भाव पर भी बेचते हैं, तब भी उन्हें अच्छा मुनाफा होता है.

कम समय, ज्यादा फायदा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ठंड के सीजन में गांठ गोभी की खेती किसान एक या दो एकड़ क्षेत्र में आसानी से कर सकते हैं. यह फसल जल्दी तैयार होती है और बाजार में इसकी मांग भी अधिक रहती है. इससे किसानों को कम समय में अच्छा आर्थिक लाभ मिल सकता है.

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उन्नत बीज का चयन जरूरी

किसानों को सलाह दी गई है कि गांठ गोभी की खेती के लिए कृषि विज्ञान केंद्र या प्रमाणित बीज भंडार से ही उन्नत किस्म के बीज खरीदें. वर्तमान में बाजार में जो नवल गोल आ रहा है, वह अर्ली किस्म का है, जिसकी रोपाई लगभग डेढ़ माह पहले की गई थी. अर्ली किस्म से किसानों को जल्दी फसल और बेहतर दाम मिलते हैं.

20 से 25 दिन में पौधे तैयार

गांठ गोभी की नर्सरी तैयार करने के 20 से 25 दिनों के भीतर पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं. उन्नत किस्म की खेती करने पर 4 से 5 गांठ गोभी मिलकर एक किलो वजन की हो जाती है. वर्तमान समय में बाजार में इसका भाव 40 से 70 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है.

कम खर्च में तैयार होने वाली फसल

गांठ गोभी की खेती में ज्यादा खर्च नहीं आता है. इसमें यूरिया और डीएपी खाद का उपयोग आवश्यकता के अनुसार किया जाता है. कम लागत में तैयार होने के कारण यह फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है.

फटने की समस्या से ऐसे करें बचाव

किसानों को यह भी बताया गया है कि कई बार गांठ गोभी में कंद फटने की समस्या देखने को मिलती है. इससे बचाव के लिए जिंक और सल्फर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके प्रयोग से फसल का आकार बड़ा होता है और वजन भी बढ़ता है. साथ ही रासायनिक खाद के साथ गोबर की खाद का उपयोग करने से भी मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है जिससे उत्पादन बेहतर होता है और लंबे समय तक जमीन की सेहत भी अच्छी रहती है.

खेती की सही विधि अपनाएं

खेती की विधि के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि खेत की अच्छी तरह से गुड़ाई कर लंबी-लंबी रो बनानी चाहिए. इसके बाद थरहा (rows) विधि से पौधों की रोपाई करनी चाहिए, ताकि पौधों को सही जगह और पोषण मिल सके.

60 दिनों में फसल तैयार

गांठ गोभी की फसल लगभग 60 दिनों में तैयार हो जाती है. इससे किसानों को धान जैसी लंबी अवधि की फसलों की तुलना में बहुत जल्दी आमदनी मिलने लगती है. जहां धान में 120 से 150 दिन का समय लगता है, वहीं गांठ गोभी से सिर्फ दो महीने में आय शुरू हो जाती है.

एक एकड़ में 300 क्विंटल तक उपज

कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि एक एकड़ में गांठ गोभी की खेती करने पर 200 से 300 क्विंटल तक उपज मिल सकती है. यदि किसान इसे मंडी में न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलो के भाव से भी बेचते हैं, तब भी उन्हें अच्छा मुनाफा होता है.

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बीज की लागत बेहद कम

इस फसल में बीज की लागत भी काफी कम है. बाजार में 10 ग्राम बीज का पैकेट 60 से 70 रुपये में उपलब्ध है, जबकि 200 रुपये में एक पाव बीज मिल जाता है. एक एकड़ खेत के लिए 700 से 800 ग्राम, या फिर अधिकतम एक किलो बीज की जरूरत पड़ सकती है.

आर्थिक मजबूती का बेहतर विकल्प

ठंड के मौसम में गांठ गोभी की खेती करके किसान कम समय में अधिक लाभ कमाई कर सकते हैं. यह फसल उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का बेहतर विकल्प बन सकती है.









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