विलुप्त होती बहुरूपिया कला को मिला नया जीवन, चिरमिरी में 11वां बहुरूपिया महोत्सव बना आकर्षण का केंद्र

विलुप्त होती बहुरूपिया कला को मिला नया जीवन, चिरमिरी में 11वां बहुरूपिया महोत्सव बना आकर्षण का केंद्र

एमसीबी/ चिरमिरी : विलुप्त होती पारंपरिक बहुरूपिया कला को संरक्षण देने और नववर्ष को उल्लासपूर्ण बनाने के उद्देश्य से युथ क्लब चिरमिरी द्वारा आयोजित 11वां वार्षिक बहुरूपिया महोत्सव इस वर्ष भी भव्यता और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। बहुरूपिया कलाकारों ने अपनी अद्भुत भाव-भंगिमाओं, सशक्त अभिनय और कलात्मक वेशभूषा के माध्यम से नगरवासियों सहित दूर-दराज से आए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

प्रतियोगिता में एकल एवं समूह वर्ग के कलाकारों ने भाग लिया। कलाकारों ने कांतारा, नरसिंह अवतार, मां काली, सांई बाबा, महारानी, कोयला श्रमिक, मुर्गा, योगा, भालू, प्रभु श्रीराम, यमराज, बाबा जगन्नाथ सहित जंगल बचाओ, पर्यावरण संरक्षण और माता-पिता की सेवा जैसे सामाजिक संदेशों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने न केवल स्वस्थ मनोरंजन किया, बल्कि समाज में जागरूकता का संदेश भी दिया।

बहुरूपिया कलाकार हल्दीबाड़ी के मुख्य मार्गों में घूम-घूमकर अपनी कला का प्रदर्शन करते रहे, जिससे पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। विभिन्न स्थानों पर नियुक्त निर्णायकों द्वारा कलाकारों का मूल्यांकन कर एकल एवं समूह वर्ग में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्रदान किए गए। महोत्सव देखने उमड़े जनसमुदाय ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और उनके साथ सेल्फी लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं।

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बहुरूपिया कलाकारों के शानदार प्रदर्शन के उपरांत अतिथियों द्वारा प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए गए।एकल वर्ग में ‘योगा से होता है सभी बीमारी का हल’ विषय पर प्रस्तुति देने वाले कलाकार को प्रथम पुरस्कार मिला, वहीं समूह वर्ग में ‘माता-पिता की सेवा कैसे करनी चाहिए’ विषय पर आधारित प्रस्तुति ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। सभी प्रतिभागी कलाकारों को सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, चिरमिरी महापौर रामनरेश राय, पूर्व विधायक विनय जायसवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि “यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। पिछले 11 वर्षों में इस वर्ष का आयोजन अद्भुत और ऐतिहासिक रहा।” उन्होंने युथ क्लब चिरमिरी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोककलाओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।










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