कुछ ही दिन पहले की बात है, छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले के पेद्दाकोड़ेपाल गांव के आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटने की एक खबर आई थी. विहान बस्तर यूट्यूब चैनल ने एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें जगह-जगह कटे हुए पेड़ों के ढेर दिखाई दे रहे हैं.
वीडियो में ग्रामीण वन विभाग के अधिकारियों से पेड़ों की कटाई को लेकर सवाल-जवाब कर रहे हैं. आदिवासी लोग पूछ रहे हैं कि बिना ग्रामसभा की अनुमति के यहां इतने बड़े पैमाने पर पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं? जिसके जवाब में बीजापुर डीएफओ रामकृष्ण को यह कहते सुना जा सकता है कि अभी जो पेड़ कटे हैं उसे उठा लिया जाएगा. और भी पेड़ों की कटाई होनी है और यह काम जारी रहेगा. वह कह रहे हैं कि इसका परमिशन केंद्र सरकार से आया हुआ है.
ग्रामीण यूट्यूबर को बता रहे हैं कि पेड़ों कटाई से लगभग 100 एकड़ जंगल साफ हो चुका है.
इस बीच, कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची का उल्लंघन करते हुए बिना ग्राम सभाओं की अनुमति के वन विभाग पेड़ों की कटाई कर रही है.
वहीं, इस मुद्दे को लेकर विवाद बढ़ते देख वन विभाग के अधिकारी रंगनाथन वाय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पेड़ों की कटाई कानून के दायरे में किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘यह कूप या कास्ट कटाई है. इस इलाके में पिछले 30 सालों से यह प्रथा बंद हो गया था, क्योंकि माओवादियों ने ट्रकों को जला दिया था. अब माओवाद अंतिम चरण में है इसलिए इसे दुबारा शुरू किया गया है.’
उन्होंने बताया कि कूप या कास्ट कटाई मानक और वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है. इस साल बीजापुर में चार जगहों पर कूप कटाई होनी है.बता दें कि कूप कटाई जंगल को बढ़ाने के लिए की जाती है, जिसमें अंदर से खोखले हुए पेड़, आड़े-तिरछे, सूखे या सूखने की क्रम में जो पेड़ हैं उन्हें काटा जाता है.
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हालांकि, सोशल मीडिया में वायरल हुए कई वीडियो में हरे-भरे पेड़ कटे हुए नजर आ रहे हैं. लोग दावा कर रहे हैं कि हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है, जिनमें महुआ, तेंदु, चार आदि के पेड़ भी शामिल हैं जिनसे स्थानीय लोग वनोपज इकट्टा करते हैं.
जैसे-जैसे माओवादी आंदोलन कमजोर पड़ता जा रहा है लोगों में अपने जल-जंगल-जमीन को उजाड़े जाने की आशंका बढ़ती जा रही है क्योंकि कई दशकों से बस्तर में जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर कई संघर्ष और आंदोलन हुए थे. इस बदलती परिस्थिति में बस्तर क्षेत्र में पांचवी अनुसूची और पेसा कानून के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग तेज हो रही है.
इसका कारण यह है कि छत्तीसगढ़ का आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र अब निवेश का नया केंद्र बन कर उभर रहा है. बस्तर को एक औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए सरकार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ, बुनियादी ढांचे (इनफ़्रास्ट्रक्चर) का विकास (जैसे रेलवे, सड़क, हवाई अड्डे) और उद्योगों को सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं देने का दावा कर रही है, ताकि निजी निवेश को आकर्षित किया जा सके.
इस बीच, 16 दिसंबर, 2025 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस ने खनन के लिए बड़े पैमाने पर जंगल काटने का मुद्दा उठाया था. पार्टी ने दावा किया कि कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर के आरिडोंगरी इलाके में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो रही है.
आज बस्तर में जो भी हो रहा है, उसकी यह एक झलक भर है. क्योंकि आने वाले समय में और ज़्यादा खदानें खोलने का प्रस्ताव है, जिससे जंगलों को बड़े पैमाने पर उजाड़े जाने की पूरी संभावना है.
सरकारी वेबसाइट छत्तीसगढ़ माइंस के अनुसार, बस्तर जिले में चूनापत्थर (रायकोट, शिवनी अलनार, बड़ांजी, कडमा, जूनागुड़ा, दऊरगांव-भुरसुंडी, चपका, देवरापाल, पोटानार-बड़ांजी, छापर, भानपुरी), डोलोमाइट (तिरीया, मचकोट क्षेत्र, कुम्हली, कुमली जीरागांव, डोकरी पखना, तराईपदर), बाक्साइट (आसना तारापुर), क्वार्टजाइट (डीलमिली), नारायणपुर जिले में लौह अस्यक (छोटेडोंगर क्षेत्र), कांकेर जिले में लौह अस्यक (रावघाट, चारगांव, हाहालादी, कोदापाल, मेटाबोदली, आरिडोंगरी), सोना (सोनदेही), ग्रेनाइट (कन्हारपुरी नरहरपुर क्षेत्र) बाक्साइट (तरान्दुल, कुमकाकुरुम), कोंडागांव जिले में बाक्साइट (केशकाल क्षेत्र – छेरबहरा, कुदरबाही, कुएमारी, बुधयारीमारी), ग्रेनाइट (फरसगांव-कोण्डागांव क्षेत्र), दंतेवाडा जिले में लौह अयस्क, टिन, गेलेना, ग्रेनाइट, क्वार्टज, लिपिडोलाइट, बीजापुर जिले में कोरंडम, ग्रेनाइट, कॉपर, बाक्साइट, इसी तरह सुकमा जिले में टिन, चूनापत्थर, लेपीडोलाइट, कोरंडम, डायमेंशन स्टोन, ग्रेनाइट, क्वार्टज, बेरिल, सिलेमेनाइट, क्ले अस्यकों के भंडारों को चिह्नित किया गया है.
जितनी ज्यादा जगहों, गांवों और जंगलों में इन खनिजों के भंडारों को चिह्नित किया गया है, शायद वहां के स्थानीय लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं होगी.

छत्तीसगढ़ की धरती के गर्भ में छिपी खनिज संपदा का भूवैज्ञानिक खाका.
निवेश की तैयारी
सरकार द्वारा सितंबर 2025 में आयोजित बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट प्रोग्राम में देश भर के बड़े उद्योगपतियों से निवेश के कई प्रस्ताव आए. इस दौरान छत्तीसगढ़ और केंद्र सरकारों ने बस्तर क्षेत्र के लिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये के निवेश परियोजनाएं और योजनाएं घोषित या प्रस्तावित किए. नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएमडीसी) अकेले ने ही 43,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में निवेश किया है.
इसमें बड़े सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं (रेल, सड़क आदि), खनन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और निजी, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निवेश प्रस्ताव भी शामिल हैं.
रेलवे ने 5,200 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है, जबकि सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को 2,300 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. एक मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
निजी क्षेत्र की ओर से लगभग 1,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावित किए गए हैं, जो मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पर केंद्रित हैं.
सरकार के अनुसार, पूरे प्रदेश में नए निवेश पर अनुदान के प्रावधान हैं. और बस्तर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं.
नई औद्योगिक नीति में बस्तर के 88 प्रतिशत ब्लॉक ग्रुप-3 में चिह्नित किए गए हैं. यहां निवेश करने वाले उद्यमियों को सर्वाधिक लाभ मिलेगा. एससी-एसटी वर्ग के उद्यमियों के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी के प्रावधान की भी बात कही गई है.
बस्तर में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों को 45 प्रतिशत सब्सिडी देने की बात कही गई है. सरकार का कहना है कि इससे होटल इंडस्ट्री, इको-टूरिज्म, वेलनेस, एडवेंचर स्पोर्ट्स आदि क्षेत्रों में निवेश के स्वर्णिम अवसर बनेंगे. होम स्टे पर विशेष अनुदान से स्थानीय उद्यमशील लोगों को भी पर्यटन क्षेत्र में अवसर मिलेगा.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 दिसंबर 2025 को जगदलपुर में बस्तर ओलंपिक्स के समापन समारोह में कहा कि अगले पांच सालों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बन जाएगा.
उन्होंने बस्तर और पूरे देश को नक्सलवाद मुक्त कराने की भाजपा सरकार के इरादे को दोहराते हुए कहा, ‘यह कोशिश यहीं नहीं रुकेगी – कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा – सात जिलों वाले बस्तर संभाग को दिसंबर 2030 तक देश का सबसे उन्नत आदिवासी संभाग बनाया जाएगा.’
खनिजों के दोहन का लंबा इतिहास
खान मंत्रालय के अनुसार, 2020 तक छत्तीसगढ़ में देश के लगभग 36% टिन अयस्क, 20% बॉक्साइट, 19% लौह अयस्क (हेमेटाइट), 6% चूना पत्थर और 4% हीरे के संसाधन हैं.
बस्तर क्षेत्र में खनिजों की खोज सबसे पहले ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई थी, जो आज भी जारी है. 1970 और 1980 के दशकों में कई सर्वे भी किए गए थे और कई जगहों पर विभिन्न किस्म के खनिजों के भंडारों को चिह्नित किया गया.
बस्तर में लिथियम के भंडार होने का भी अनुमान है. इनकी खोज 1970 और 80 के दशकों में हुई थी. बस्तर क्रेटन में तोंगपाल, गोविंदपाल, चुइरवाड़ा, चिंतलनार, मुंडवाल और बेकुपाड़ा जैसे इलाकों में लिथियम वाले पेग्माटाइट होने की बात सामने आई.

बस्तर अंचल का भूवैज्ञानिक एवं खनिज बेसिन मानचित्र
दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला क्षेत्र में एनएमडीसी द्वारा कई दशकों से माइनिंग की प्रक्रिया जारी है जिसका लगातार विस्तार किया जा रहा है. अब इन्हीं पहाड़ों में मौजूद ब्लॉक 1ए और 1बी को आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील कंपनी को और ब्लॉक 1सी को रूंगटा सन्स कंपनी को आवंटित किया गया.
इसके अलावा अडानी एंटरप्राइजेज को बैलाडीला डिपॉजिट-13 लौह अयस्क खदान के लिए खान डेवलपर-कम-ऑपरेटर (एमडीओ) नियुक्त किया गया है.
इस बीच, बैलाडीला खदान के डिपॉजिट-4 विस्तार को लेकर वहां के आदिवासी और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. कई राजनीतिक दल भी ग्रामीणों के समर्थन में आए हैं. लोगों का मानना है कि यह पहाड़ी उनके लिए आस्था का केंद्र है.
उत्तर बस्तर क्षेत्र में स्थित हाहालादी पहाड़ों में माइनिंग का ठेका पुष्प स्टील्स और माइनिंग कंपनी सागर स्टोन को मिला है, जबकि श्री बजरंग पॉवर कंपनी पहले से माइनिंग कर रही है. इसके अलावा, कांकेर जिले के रावघाट और चारगांव में, नारायणपुर जिले के आमदई पहाड़ों के अलावा कई जगहों पर माइनिंग का काम पहले से जारी है.
दंतेवाड़ा, सुकमा और बस्तर जिलों में राज्य के खनिज विभाग द्वारा टिन के तीन ब्लॉक को खनन के लिए चिह्नित किया गया है. राज्य सरकार ने अप्रैल 2025 में तीन टिन भंडारों की भूवैज्ञानिक रिपोर्ट ई-नीलामी की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को सौंपी थी.
दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देश्यीय परियोजना को, जो स्थानीय आदिवासियों के विरोध के कारण 1970 के दशक से लंबित था, जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर से हरी झंडी दे दी.
कांग्रेस सरकार के दौरान खदानों का आवंटन
सितंबर 2022 में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक हितधारक सम्मेलन (स्टेकहोल्डर्स कॉन्फ्रेंस) आयोजित किया था. इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सरकार ने खनन की संभावनाओं वाले 108 ब्लॉकों की एक सूची शेयर की थी, जो अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) के विभिन्न चरणों में थे. इनमें से 39 साइटें बस्तर क्षेत्र में स्थित हैं.
भारत सरकार की आधिकारिक क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक ऑक्शन वेबसाइट/MSTC पर बस्तर क्षेत्र के कुल 3,640.559 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले 16 ब्लॉक नीलामी के लिए सूचीबद्ध थे. इनमें से चार ब्लॉकों की नीलामी 2023 में की जा चुकी है.

13 मार्च, 2024 को छत्तीसगढ़ सरकार ने कोंडागांव, नारायणपुर और बस्तर जिलों में 1,478 वर्ग किलोमीटर इलाके में हीरा और दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ ग्रुप मिनरल्स) के लिए तीन ‘अन्वेषण लाइसेंस’ (Exploration License-EL) ब्लॉकों की निविदाएं आमंत्रित करने की अधिसूचना जारी की थी.
छोटी निजी कंपनियों को खदानों का आवंटन
बस्तर जिले के दरभा इलाके में छोटेकडमा के पास 3.420 हेक्टेयर जमीन में चूना पत्थर खदान के लिए कुरसम सांबैया को आवंटित की गई है. खनन योजना का अनुमोदन कलेक्टर कार्यालय (खनिज शाखा), दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा द्वारा किया गया है. इसका प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 62,500 टन प्रति वर्ष (TPA) चूना पत्थर है.
यह खदान कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान परियोजना स्थल से 3.73 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और पर्यावरण के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील क्षेत्र में आता है.
विमल स्टोन एसोसिएट्स (वीएसए) को जगदलपुर से लगभग 18 किमी दूर स्थित मोंगरापाल क्षेत्र में रंगीन स्ट्रोमैटोलिटिक चूना पत्थर के लिए खनन पट्टा दिया गया है.
कांकेर जिले के कच्छे गांव के पास गोड़ावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड को उनकी मौजूदा खदान से सटे अतिरिक्त 32.36 हेक्टेयर क्षेत्र में लौह अयस्क खनन पट्टा प्रदान किया गया है.
नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर आरक्षित वन क्षेत्र में एक नई लौह अयस्क खदान के लिए श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड ने पर्यावरण स्वीकृति हेतु आवेदन दिया है.
बस्तर के संसधानों को निजी औद्योगिक घरानों को सौंपने का आरोप
इसी दौरान, छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के प्रमुख अमित जोगी ने केंद्र सरकार पर नगरनार एनएमडीसी स्टील प्लांट को निजी हाथों में बेचने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 29 अक्टूबर, 2025 को एनएमडीसी ने एनएसएल (नगरनार एनएमडीसी स्टील लिमिटेड) के 90 प्रतिशत स्टॉक को निजी हाथों में बेचने का फैसला किया है.
हालांकि ऐसे आरोप शुरू से ही लग रहे थे – सरकारों का इरादा यही है कि बस्तर क्षेत्र में सार्वजनिक कंपनी एनएमडीसी के जरिए परियोजनाओं को शुरू करके, उनके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे खड़े करके, अंततः उन्हें निजी कंपनियों के हवाले कर देना है.
अमित जोगी ने कहा – ‘सरकार निश्चित रूप से बस्तर से नक्सलवाद को खत्म कर रही है, लेकिन साथ ही वह ‘अडानीवाद’ को बढ़ावा दे रही है. बैलाडीला के डिपॉजिट नंबर 13 से लेकर नगरनार तक और छत्तीसगढ़ की कई खदानों और खनिज भंडारों तक – सब कुछ अडानी को बेच दिया गया है.’
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इससे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दीपक बैज ने कहा था कि यह तो सिर्फ शुरुआत है और बस्तर की सारी कीमती खनिज संपदा अडानी और अन्य निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बस्तर में अडानी के लिए रेड कार्पेट बिछाई जा रही है.हालांकि छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा कहते हैं कि बस्तर का पूरा जल-जंगल-जमीन बस्तर के लोगों का है और पेसा, ग्रामसभा आदि कानूनों का बेहतर क्रियान्वयन किया जाएगा.
बहरहाल, बस्तर में पहले से जारी और आगे आने वाली माइनिंग परियोजनाओं को लेकर पक्ष और विपक्ष चाहे जो भी कहें, माइनिंग लॉबी जितनी तेजी से बस्तर की ओर रुख कर रही है, उसे देखते हुए वहां की आदिवासी आबादी आशंकित है कि उनके जल-जंगल-जमीन के सामने गंभीर खतरा है.
बस्तर के युवा अब सोशल मीडिया में आए दिन नए-नए वीडियो डाल रहे हैं जिसमें पेड़ काटे जाने या जंगलों के विनाश के दृश्य दिखाई दे रहे हैं. उनकी शिकायत है कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है और उनके अधिकारों का हनन हो रहा है.
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