आतिशी के बयान पर सियासत गरमाई,जानें विधानसभा में ऐसा क्या कहा दिया?

आतिशी के बयान पर सियासत गरमाई,जानें विधानसभा में ऐसा क्या कहा दिया?

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता डॉ. आतिशी के खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक मोर्चा खुल गया है. रेखा गुप्‍ता सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और अन्य सदस्यों ने दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र लिखकर आतिशी पर सदन के भीतर बेहद अमर्यादित और शर्मनाक टिप्पणी करने का गंभीर आरोप लगाया है. पत्र में दावा किया गया है कि मंगलवार जनवरी, 2026 को सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा में गुरु तेग बहादुर जी की महान शहादत के सम्मान में नियम-270 के अंतर्गत विशेष चर्चा चल रही थी. इसी चर्चा के दौरान डॉ. आतिशी द्वारा दिए गए वक्तव्य को अमर्यादित और मर्यादाहीन बताया गया है.

पत्र में की गई तीन बड़ी मांगें
शिकायती पत्र के माध्यम से सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष से आतिशी के खिलाफ तीन प्रमुख और सख्त कार्रवाइयों की मांग की है:

· आपराधिक मुकदमा: सदस्यों की पहली मांग है कि इस पूरे मामले में डॉ. आतिशी के खिलाफ तुरंत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए.

· सदस्यता रद्दीकरण: पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आतिशी की दिल्ली विधानसभा से सदस्यता तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी जानी चाहिए.

· जेल की सजा: शिकायतकर्ताओं का मानना है कि अध्यक्ष को अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्हें जेल की सजा देनी चाहिए. पत्र में कड़े शब्दों में लिखा गया है कि गुरु तेग बहादुर जी का अपमान करने वालों का स्थान सदन नहीं, बल्कि तिहाड़ जेल है.

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आतिशी ने ऐसा क्‍या कहा था?
सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि दिल्ली के लोग प्रदूषण के कारण सांस नहीं ले पा रहे हैं. उन्होंने अध्यक्ष से मांग की कि प्रदूषण को चर्चा का मुख्य मुद्दा बनाया जाए. आतिशी ने आरोप लगाया कि दिल्ली के लोग प्रदूषण से मर रहे हैं और उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता. उन्होंने सरकार को बचाने के बजाय सबसे पहले प्रदूषण पर चर्चा कराने का आग्रह किया. बयान के अंत में उन्होंने कथित तौर पर कहा, "कहते हैं कुत्तों का सम्मान करो, गुरु का सम्मान करो." उनके इसी वक्तव्य को अभद्र और अपमानजनक माना जा रहा है.

"देश के संसदीय इतिहास की पहली घटना"
पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि देश की आजादी से लेकर आज तक किसी भी सदन में किसी सदस्य द्वारा किसी गुरु के संबंध में ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया गया है. मनजिंदर सिंह सिरसा और उनके साथ अन्य सदस्यों ने इस व्यवहार को ऐतिहासिक रूप से गलत ठहराया है. उन्होंने आतिशी द्वारा कहे गए शब्दों की टाइप की गई प्रति भी पत्र के साथ संलग्न की है, ताकि साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जा सके.

क्‍या कहता है कानून?
विधानसभा नियमों के अनुसार, सदन की मर्यादा का उल्लंघन करने पर अध्यक्ष को कड़ी कार्रवाई की शक्तियां प्राप्त हैं. मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा दिए गए पत्र में नियम-270 के तहत डॉ. आतिशी की सदस्यता रद्द करने और जेल भेजने की मांग की गई है. कानूनन, यदि कोई सदस्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली या असंसदीय भाषा का प्रयोग करता है, तो सदन की विशेषाधिकार समिति इसकी जांच कर सकती है. दोषी पाए जाने पर सदन प्रस्ताव पारित कर सदस्य को निष्कासित कर सकता है. इसके अलावा, गुरु तेग बहादुर जी जैसे सम्मानित व्यक्तित्व पर अमर्यादित टिप्पणी के मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है.

हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख सदस्य
इस मांग पत्र पर मनजिंदर सिंह सिरसा के अलावा आशीष सूद, प्रवेश साहिब सिंह, कपिल मिश्रा, डॉ. पंकज सिंह, रविन्द्र इन्द्राज और अभय वर्मा जैसे प्रमुख नेताओं के हस्ताक्षर मौजूद हैं. सदस्यों ने आशा व्यक्त की है कि विधानसभा अध्यक्ष इस संवेदनशील मामले में अविलंब निर्णय लेते हुए उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे. यह पत्र 7 जनवरी, 2026 को जारी किया गया है, जिसने दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज कर दी है.










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