रामानुजगंज : जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव के केनवारी में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान उस वक्त तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब वन विभाग की टीम और ग्रामीण आमने-सामने आ गए। जिस वन भूमि पर ग्रामीणों द्वारा कब्जा किया गया था, वहां अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया, जिससे विवाद बढ़ता चला गया।
स्थिति बिगड़ते देख वन विभाग ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए दोनों पक्षों को समझाइश दी और किसी तरह मामले को शांत कराया। हालांकि इस दौरान गांव में तनाव का माहौल बना रहा।
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बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में जमीन विवाद की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर इन विवादों के पीछे राजनीतिक संरक्षण को मुख्य कारण माना जा रहा है। आरोप है कि वोट बैंक की राजनीति के तहत पहले अतिक्रमण को मौन सहमति दी जाती है और बाद में जब मामला तूल पकड़ता है, तो दबाव बनाकर संबंधित विभागों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करवाई जाती है।
जानकारों का कहना है कि जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होती है और एक पक्ष मदद की गुहार लगाता है, तो दोनों पक्षों को आमने-सामने कर दिया जाता है। परिणामस्वरूप विवाद बढ़ता है और अंत में शासकीय कार्य में बाधा के आरोप में भोले-भाले ग्रामीणों को हवालात तक पहुंचना पड़ता है, जबकि असली जिम्मेदार पर्दे के पीछे सुरक्षित रहते हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि जिले में वर्षों से जमे कुछ अधिकारी और कर्मचारी राजनीतिक संरक्षण के चलते कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं। इसका सीधा खामियाजा उन ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें कभी अतिक्रमण के लिए उकसाया जाता है और फिर कार्रवाई के नाम पर अपराधी बना दिया जाता है।
अब सवाल यह है कि जमीन विवादों में असली जिम्मेदारों पर कब कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह सिस्टम का बोझ ग्रामीणों के कंधों पर ही डाला जाता रहेगा?
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