छत्तीसगढ़ में रबी सीजन के दौरान फूलगोभी की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कृषि विज्ञान केंद्र रायपुर के उद्यानिकी विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार साहू ने बताया कि जिन किसानों ने अभी मध्यम अवधि की फूलगोभी की फसल लगाई है, उन्हें इस समय विशेष रूप से खाद प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता है. यदि इस चरण में पोषण प्रबंधन में लापरवाही बरती जाती है तो पौधों की बढ़वार और फूल की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ सकता है.
फर्टिगेशन करने पर पौधों की ग्रोथ बेहतर
डॉ. साहू के अनुसार, फूलगोभी की फसल में इस समय संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की आवश्यकता होती है. जो किसान ड्रिप सिंचाई विधि से फूलगोभी की खेती कर रहे हैं, उनके लिए फर्टिगेशन एक प्रभावी तकनीक है. उन्होंने बताया कि ड्रिप के माध्यम से NPK 19:19:19 या 12:61:00 खाद का 2 किलो प्रति एकड़ की दर से फर्टिगेशन करने पर पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है. इससे पौधे मजबूत बनते हैं और आगे चलकर फूल का आकार और गुणवत्ता भी अच्छी मिलती है.
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है
सही उपयोग किसानों के लिए लाभकारी
उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान समय में बाजार में सीबीड्स आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं, जिनका सही उपयोग किसानों के लिए लाभकारी हो सकता है. इसके साथ ही ह्यूमिक एसिड और बायोजिम जैसे जैविक उत्पादों का प्रयोग भी फूलगोभी की फसल में सकारात्मक परिणाम देता है. यदि किसान प्रत्येक सप्ताह 200 एमएल की मात्रा में ह्यूमिक एसिड या बायोजिम का प्रयोग करते हैं, तो पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं, ग्रोथ तेज होती है और पौधे चमकदार दिखाई देते हैं. इससे फूल का विकास भी समान रूप से होता है और उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है.
डॉ. मनोज कुमार साहू ने फूलगोभी की किस्मों के चयन को लेकर भी किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के मौसम और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वाइट क्रिस्टल, पूसा सिंथेटिक फूलगोभी और पूसा शुभ्रा जैसी किस्में अच्छी मानी जाती हैं. हालांकि, इनमें से वाइट क्रिस्टल किस्म को रबी सीजन के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. यह किस्म न केवल अच्छी सफेद रंगत देती है, बल्कि इसका फूल भी गठीला और आकर्षक होता है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है.
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments