दुर्ग-भिलाई: दुर्ग जिले में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग ने रविवार को संयुक्त रूप से स्कूल बसों की जांच की। जांच सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार पुलिस ग्राउंड, सेक्टर-06 भिलाई में लगाई गई, जिसमें जिले के 21 शैक्षणिक संस्थानों की कुल 230 स्कूल बसों की निगरानी की गई।
जांच के दौरान 65 स्कूल बसों में अलग-अलग प्रकार की खामियां पाई गईं। इन खामियों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहनों पर चालान किया गया और कुल 50,900 समन शुल्क वसूला गया। पुलिस का कहना है कि स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी खामियों को दूर करने के बाद ही बसों का संचालन किया जाए।इसके साथ ही ड्राइवर और कंडक्टरों के भी स्वास्थ्य की जांच की गई। खासकर आंखों की जांच में 26 ड्राइवरों में दृष्टि संबंधी समस्याएं पाई गईं, जिन्हें चश्मा लगाने या चश्मे का नंबर बढ़वाने की सलाह दी गई।
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स्कूली बसों की जांच में सबसे पहले बसों का पंजीकरण किया गया। इसके बाद परिवहन विभाग की ओर से दस्तावेजों की गहन जांच की गई। इसमें वाहन का रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, बीमा, पीयूसी, रोड टैक्स और चालक का लाइसेंस चेक किया गया।दस्तावेजों के बाद बसों की मैकेनिकल फिटनेस की जांच हुई। जिसमें हेडलाइट, ब्रेक लाइट, पार्किंग लाइट, इंडिकेटर, बैक लाइट, मीटर, स्टीयरिंग, टायर, क्लच, एक्सीलेटर, सीट, हॉर्न, वाइपर और आगे-पीछे रिफ्लेक्टर की स्थिति परखी गई।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप बसों में जीपीएस, सीसीटीवी कैमरा, स्पीड गवर्नर, प्रेशर हॉर्न, आपातकालीन खिड़की, स्कूल का नाम, टेलीफोन नंबर, चालक का मोबाइल नंबर, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और आगे-पीछे “स्कूल बस” लिखा होना अनिवार्य रूप से जांचा गया।
यातायात पुलिस और परिवहन विभाग ने बताया कि जो स्कूल बसें इस जांच शिविर में शामिल नहीं हो सकीं, उन्हें सड़क पर परिवहन के दौरान रोककर जांचा जाएगा। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन से अपील की है कि वे बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न करें और सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

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