बलौबाजार : भाटापारा शहर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के साथ उसके ही पिता द्वारा किए गए दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी के मामले में न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी विष्णु पवार पर अपनी 9 वर्षीय पुत्री के साथ दैहिक शोषण करने का आरोप था। मामला भाटापारा के ईश्वरी प्रसाद धुरंधर वार्ड का है। विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी ने बताया कि पीड़िता की मां ने 14 सितंबर 2023 को भाटापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि वह अपने पति व बच्चों के साथ अपने मायके में रहती थीं। आरोपी पति, जो रोज़ी-मजदूरी करता है, ने 26 अप्रैल 2023 को अपनी 9 वर्षीय बेटी को अकेला पाकर उसके साथ दैहिक शोषण किया। जब घटना की जानकारी पीड़िता की मां को हुई, तो आरोपी ने अपराध स्वीकार करते हुए रिपोर्ट दर्ज करने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद आरोपी अपने गांव मनसर चला गया।
प्रार्थी की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की। पुलिस ने साक्ष्य संकलन, गवाहों के बयान, घटनास्थल की छानबीन और अन्य जांच कार्यवाही पूरी की। आरोपी फरार रहने के कारण न्यायालय में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। 19 अगस्त 2024 को आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। न्यायालय में सभी गवाहों और पीड़िता के कथन दर्ज किए गए। पीड़िता और उसकी मां ने विस्तार से बताया कि आरोपी द्वारा किया गया अपराध कितना घिनौना और निंदनीय था। विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी ने बहस में कहा कि ऐसे अपराधी समाज के लिए अत्यंत घातक हैं और उनकी कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए।
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अपर सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार जायसवाल ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी द्वारा किया गया अपराध सामाजिक और नैतिक दृष्टि से अत्यंत गंभीर है। न्यायालय ने आरोपी विष्णु पवार को पाक्सो एक्ट की धारा में दोषी मानते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही यह फैसला अन्य संभावित अपराधियों के लिए चेतावनी के रूप में भी माना जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी ने शासन की ओर से पैरवी करते हुए कहा कि ऐसे अपराधों को अंजाम देने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानून कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करता है। उन्होंने न्यायालय से आरोपी को कठोरतम दंड देने की मांग की। भाटापारा पुलिस और न्यायालय की सतर्क कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि बाल सुरक्षा और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस फैसले से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिला, बल्कि समाज में बच्चों के प्रति अपराध करने वालों के लिए भी कड़ा संदेश गया है। यह मामला बलौबाजार और छत्तीसगढ़ में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर नकेल कसने और पाक्सो एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक मिसाल साबित हुआ है।

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