सोनहत, कोरिया : कोरिया जिला अंतर्गत आने वाले सोनहत जनपद पंचायत में इन दिनों सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। विकास कार्यों को गति देने और ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने की जिम्मेदारी संभालने वाला यह विभाग खुद 'स्टाफ' की भारी कमी से जूझ रहा है। आलम यह है कि पूरे जनपद की 42 ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों और मनरेगा की जिम्मेदारी महज एक सब-इंजीनियर के भरोसे टिकी है।
अकेले कैसे होगा 42 पंचायतों का निरीक्षण? सोनहत जनपद भौगोलिक दृष्टि से काफी विस्तृत और वनाच्छादित क्षेत्र है। यहाँ की 42 ग्राम पंचायतों में सैकड़ों निर्माण कार्य और मनरेगा के तहत दर्जनों प्रोजेक्ट्स संचालित होते हैं। नियमानुसार, हर निर्माण कार्य का तकनीकी मूल्यांकन, लेआउट, स्थल निरीक्षण और एम.बी. भरने का काम सब-इंजीनियर का होता है। सवाल यह उठता है कि क्या एक अकेला व्यक्ति 42 पंचायतों में चल रहे कार्यों की गुणवत्ता की जांच कर पाएगा? क्या वह समय पर सभी पंचायतों का भ्रमण कर पाएगा?
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मनरेगा मजदूरों के भुगतान पर संकट
मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में समय पर 'मस्टर रोल' बंद करना और मूल्यांकन करना अनिवार्य होता है ताकि मजदूरों को समय पर मजदूरी मिल सके। एक ही सब-इंजीनियर होने के कारण मूल्यांकन में देरी हो रही है, जिससे मजदूरों का भुगतान अटकने की आशंका बनी रहती है। इससे न केवल ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है, बल्कि सरकार की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। किसी भी निर्माण कार्य जैसे सीसी रोड, नाली, स्कूल भवन या पंचायत भवन के लिए इंजीनियर की देखरेख जरूरी होती है। जब एक इंजीनियर पर 42 पंचायतों का दबाव होगा, तो वह हर जगह उपस्थित नहीं रह सकेगा। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होना तय है। सरपंचों और सचिवों का कहना है कि तकनीकी स्वीकृति और मूल्यांकन के लिए उन्हें हफ्तों इंतजार करना पड़ता है, जिससे विकास कार्य ठप पड़े हैं।

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