नई दिल्ली: पाकिस्तान में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि हर चार में से एक परिवार आज यह नहीं जानता कि कल उसके घर चूल्हा जलेगा या नहीं।छह साल बाद जारी परिवार एकीकृत आर्थिक सर्वेक्षण (एचआइईएस) ने देश में बढ़ती गरीबी और भुखमरी की भयावह तस्वीर पेश की है।सर्वेक्षण के मुताबिक, खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे परिवारों की संख्या 2018-19 के 15.9 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 24.4 प्रतिशत पहुंच चुकी है। यानी आज पाकिस्तान का हर चौथा परिवार बुनियादी पोषण की जरूरतें भी पूरी नहीं कर पा रहा।शहरों में भी थाली खाली, गांवों में हालात बदतरखाद्य असुरक्षा अब सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रही।
पाकिस्तान में भुखमरी के हालात
शहरी इलाकों में 20.6 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 26.7 प्रतिशत परिवार भोजन की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, संतुलित भोजन अब चार में से एक पाकिस्तानी परिवार के लिए सपना बन चुका है। कम खाना, घटिया खाना, सेहत पर खतराजो परिवार तकनीकी रूप से खाद्य असुरक्षा रेखा से ऊपर हैं, वे भी कम और खराब गुणवत्ता वाला भोजन कर रहे हैं। गेहूं, दूध, अंडे और पोल्ट्री की प्रति व्यक्ति खपत घटी है, जबकि लोग सस्ती कार्बोहाइड्रेट जैसे गेहूं और चीनी पर निर्भर हो गए हैं। यह उस देश के लिए और खतरनाक है, जहां टाइप-2 डायबिटीज पहले से महामारी का रूप ले चुकी है।
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शिक्षा का भी स्तर घटा
भूख के साथ शिक्षा भी ढहीघरेलू बजट में शिक्षा पर खर्च चार प्रतिशत से गिरकर 2.5 प्रतिशत रह गया है। सार्वजनिक शिक्षा पहले ही नाकाम थी, अब निजी स्कूल भी आम परिवार की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। पिछले छह वर्षों में डालर के हिसाब से वास्तविक घरेलू आय 3.4 प्रतिशत घटी, जबकि खर्च चार प्रतिशत बढ़ा, जिससे घरेलू बचत में 66 प्रतिशत की गिरावट आई।इससे निवेश और उत्पादकता दोनों प्रभावित हुए हैं। कंक्रीट बन रही है, इंसान टूट रहे हैंरिपोर्ट में सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा गया है कि जब देश भूख और बेरोजगारी से जूझ रहा है, तब सरकारी धन पुलों और अंडरपास पर बहाया जा रहा है।चेतावनी दी गई है कि यदि खर्च को रोजगार और समावेशी विकास की ओर नहीं मोड़ा गया, तो पाकिस्तान की यह राह वाकई कहीं नहीं जाएगी।

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