एक दिन बाद 15 जनवरी को  मनाई गई मकर संक्रांति,नदी जलसरोवरो में लगाया आस्था की डुबकी

एक दिन बाद 15 जनवरी को मनाई गई मकर संक्रांति,नदी जलसरोवरो में लगाया आस्था की डुबकी

सरगुजा : प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी के दिन मकर संक्रांति पर्व मनाये जाने की परिपाटी रही है। लेकिन पंचांग में तिथि भेद होने कारण 15 जनवरी दिन गुरुवार को लखनपुर सहित आसपास ग्रामीण इलाकों में मकर संक्रांति पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। दरअसल पौराणिक मान्यता रही है कि जब भगवान भास्कर मकर राशि में संक्रमण करते हैं अर्थात प्रवेश कर उतरायण हो जाते हैं उस शुभ तिथि में ही मकरसंक्रांति पर्व मनाई जाती है। परंतु कुछ जानकार पंडितों तथा पंचांग के अनुसार इस वर्ष भगवान सूर्य पौष कृष्ण एकादशी बुधवार को रात्रि 9.39 बजे मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं ।

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इस वजह से एक दिन बाद संक्रांति पर्व मनाया गया। शास्त्रोक्त नियम है कि प्रदोष के बाद रात्रि में किसी भी समय संक्रांति लगती है तो इसका पुण्य काल दूसरे दिन होता है।इस तरह श्रद्धालुओं ने नदी तालाब जलसऱवरो में आस्था का डुबकी लगाया तथा मकर संक्रांति खिचड़ी पर्व 15 जनवरी दिन गुरुवार को श्रद्धा भक्ति के साथ मनाईं गई । तीर्थ क्षेत्रो में गंगा नदी तालाब जलसऱवरो में स्नान करना शुभकर माना जाता है इस धार्मिक मान्यताओं को लेकर लोगों ने सुबह नदी तालाब जलसऱवरो में जाकर आस्था के डुबकी लगाये। भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना करने पश्चात मंदिर देवालयों में जाकर माथा टेका।

स्नान दान के नजरिए से यह पर्व बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।ऊनी दुशाला कम्बल जूता पुस्तके पंचांग आदि का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है । जिसे श्रद्धालुओं ने बखूबी निभाया लोगों ने भंडारे का आयोजन कर जरूरतमंदों को भोजन कराया गर्म कपड़े दान किये।मकर संक्रांति पर तील के लड्डू मिष्ठान एवं खिचड़ी सेवन करना बाटना शुभ माना जाता है । लोगों ने तील के लड्डू मिष्ठान बांटे। बहरहाल तिथि भेद होने कारण नगर लखनपुर सहित आसपास गांवों में कहीं कहीं मकर संक्रांति षट्तिला एकादशी पर्व बुधवार को मनाई गई। अधिकांश श्रद्धालु पंचांग के अनुयायी गुरुवार को मकर संक्रांति धूमधाम से मनाया। कुछ सेवा भावी लोगों ने जरूरतमंदों को भोजन कराया तथा गर्म कपड़ों का दान किया।







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